हाईकोर्ट ने लोक सेवा आयोग से मांगा जवाब:एपीओ भर्ती में आरक्षण का मामला, 10 अगस्त को होगी सुनवाई


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी लोक सेवा आयोग की एपीओ भर्ती 2025 में आरक्षण नियमों के उल्लंघन को लेकर दाखिल याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 10 अगस्त की तारीख लगाई है। याचियों के अधिवक्ता ने कोर्ट में आयोग के पूरक शपथ पत्र का जवाब दाखिल किया। कोर्ट ने उसको रिकॉर्ड पर ले लिया उसके बाद सुनवाई शुरू हुई। दोनों पक्षों के द्वारा अपने अपने सपोर्ट में कोर्ट को दिए गए विभिन्न निर्णयों के कंपाइलेशन पर विचार करने के बाद कोर्ट ने आयोग से 7 अगस्त तक काउंटर एफिडेविट दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने पूछे हैं कई सवाल कोर्ट ने आयोग से इस बात का एफिडेविट दाखिल करने के लिए कहा है कि आयोग यह स्पष्ट करे कि प्री एग्जाम में जनरल कैटेगरी का रिजल्ट/कट ऑफ मेरिट के आधार पर बनाया जाता है या फिर रिजर्व कैटिगरी कैंडीडेट्स के छोड़कर सिर्फ जनरल कैटिगरी कैंडीडेट्स को ही जनरल कैटेगरी में रखकर प्रीलिम्स का रिजल्ट तैयार किया जाता है। आरक्षण के नियमों में फेरबदल पर बहस बहस के दौरान जस्टिस मनीष कुमार निगम ने आयोग से बार-बार यह सवाल पूछा कि जब जनरल कैटेगरी एक ओपन (अनारक्षित) कैटेगरी होती है, तो उसमें प्रीलिम्स का रिजल्ट तैयार करने की कौन सी प्रक्रिया अपनाई जाती है? कोर्ट ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि यदि आरक्षण के नियमों में फेरबदल कर अभ्यर्थियों का चयन मुख्य परीक्षा के लिए किया गया है तो यह संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 का सीधा उल्लंघन है, और यदि प्रीलिम्स परीक्षा का रिजल्ट शुद्ध रूप से मेरिट के आधार पर हुआ है तो आयोग इसे हलफनामे पर लिखित रूप में प्रस्तुत करे। , कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के चर्चित ‘रजत यादव’ जजमेंट का संदर्भ देकर आयोग से कहा कि ओपन केटेगरी का मतलब सभी वर्गों के अभ्यर्थियों को मेरिट के आधार पर स्थान देना है। इसके साथ ही कोर्ट ने आयोग को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए 7 अगस्त तक का समय देते हुए शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचियों के अधिवक्ता को 2 दिन में उसका जवाब दाखिल करने का समय दिया है ताकि मामले की अंतिम व निर्णायक सुनवाई 10 अगस्त को हो सके। जानिये क्या है मामला गौरतलब है कि पंकज वर्मा और दो अन्य ने यूपी लोक सेवा आयोग के 09 जनवरी 2020 को जारी ऑफिस मेमोरेंडम और यूपी एपीओ 2025 की प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट को याचिका में चुनौती दी है। याचियों का कहना है कि मेरिटोरियस रिजर्व्ड कैटेगरी कैंडिडेट्स को प्रीलिम्स परीक्षा में ओपन केटेगरी में स्थान नहीं दिया गया है और उन्हें उनकी ही केटेगरी में रखा गया है। इसलिए आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया है। जिससे याचियों का चयन प्रीलिम्स परीक्षा में नहीं हो सका है।
इसलिए ऑफिस मेमोरेंडम और प्रीलिम्स रिजल्ट को निरस्त किया जाए और मेंस परीक्षा को स्थगित किया जाए। मेरिटोरियस रिजर्व्ड कैटेगरी कैंडिडेट्स को प्रीलिम्स परीक्षा में ओपन केटेगरी में स्थान देते हुए प्रीलिम्स का रिजल्ट फिर से बनाने का आदेश दिया जाए। क्योंकि लोक सेवा आयोग का ऑफिस मेमोरेंडम ये कहता है कि आरक्षण का लाभ सेलेक्शन के अंतिम चरण में दिया जाएगा, जो यूपी रिजर्वेशन एक्ट 1994 की धारा 3(6) और सुप्रीम कोर्ट द्वारा दीपेंद्र यादव व सौरव यादव तथा अन्य कई मामलों में दिए गए निर्णयों के विपरीत है।

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