सोनभद्र में अभ्युदय योजना निःशुल्क कोचिंग सेंटर शुरू:राज्य मंत्री संजीव गोंड ने किया शुभारंभ, UPSC, NEET, JE अभ्यर्थियों को लाभ


सोनभद्र में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत निःशुल्क कोचिंग सेंटर का शुभारंभ किया गया है। जिला पंचायत रिसोर्स सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य मंत्री समाज कल्याण संजीव कुमार गोंड ने कोचिंग का उद्घाटन किया और छात्र-छात्राओं को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर डीएम चर्चित गौड़ और सीडीओ जागृति अवस्थी भी उपस्थित रहीं। उन्होंने विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से लेकर सफलता प्राप्त करने तक के अपने अनुभव साझा करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम में यूपीएससी, नीट, जेई सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राएं, शिक्षकगण और संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। राज्य मंत्री संजीव कुमार गोंड ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ऐसे प्रतिभाशाली और परिश्रमी युवाओं को आगे बढ़ने का बेहतर अवसर प्रदान कर रही है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर अपने भविष्य को नई दिशा देना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के माध्यम से विद्यार्थियों को निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण कोचिंग और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। डीएम चर्चित गौड़ ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने स्वयं बिना कोचिंग के परीक्षा उत्तीर्ण की थी। डीएम ने स्पष्ट किया कि कोचिंग केवल मार्गदर्शन का एक माध्यम हो सकती है, लेकिन सफलता का वास्तविक आधार विद्यार्थी का स्वाध्याय, अनुशासन, सही रणनीति और निरंतर अभ्यास है। उन्होंने अभ्यर्थियों को सलाह दी कि वे सबसे पहले परीक्षा के पाठ्यक्रम और पैटर्न को अच्छी तरह समझें। इसके साथ ही, सीमित एवं गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री का चयन करें और अपनी क्षमता के अनुरूप दैनिक अध्ययन की ठोस कार्ययोजना बनाएं। जिलाधिकारी ने विद्यार्थियों को पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का नियमित अभ्यास करने, समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने तथा समय-समय पर अपनी तैयारी का स्वयं मूल्यांकन करने की सलाह भी दी। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे अभ्यर्थियों से तुलना करने के बजाय अपनी कमियों को पहचानकर उनमें निरंतर सुधार करें।

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