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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पॉक्सो एक्ट से जुड़े एक मामले में आरोपी रामसहाय उर्फ रामू को अग्रिम जमानत दे दी। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने यह आदेश सिद्धार्थनगर के गोलहरा थाने में दर्ज केस में दिया है। आरोपी के अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि पीड़िता एफआईआर दर्ज कराते समय लगभग 20 वर्ष की वयस्क महिला थी और दोनों के बीच करीब पांच वर्षों से सहमति से संबंध चल रहे थे।
उनका कहना था कि रिश्ता खराब होने पर एफआईआर दर्ज कराई गई, जबकि यह मामला वास्तव में विवाह के टूटे वादे से जुड़ा प्रेम-संबंध का है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई महिला लंबे समय तक जानते-बूझते किसी पुरुष के साथ शारीरिक संबंध में रहती है और शुरुआत से धोखे का कोई ठोस सबूत नहीं मिलता, तो ऐसे मामलों को दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि बिगड़े हुए प्रेम-संबंधों को आपराधिक रंग देने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो न्याय व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। इन आधारों पर कोर्ट ने आरोपी को 50,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानतों पर अग्रिम जमानत देने का आदेश दिया, साथ ही विवेचना में सहयोग करने, गवाहों को प्रभावित न करने और अदालत की अनुमति के बिना देश न छोड़ने जैसी शर्तें लगाईं।
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सहमति से बने संबंध, पॉक्सो आरोपी को जमानत:हाईकोर्ट ने 50 हजार रुपये के निजि मुचलनके पर अग्रिम जमानत दी