सबकी खुशी के चक्कर में नाराज हो रहे नेता:एक ने पद छोड़ने की घोषणा की; दो नेताओं के कद घटे


लंबे इंतजार के बाद भाजपा की ओर से क्षेत्रीय कार्यसमिति की घोषणा कर दी गई। इसमें अधिक से अधिक नेताओं को साधने की कोशिश की गई है। इसी कोशिश में पद की संख्या भी बढ़ा दी गई लेकिन सबको खुश करने के चक्कर में भाजपा नेता नाराज हो रहे हैं। देवरिया के अम्बुज शाही ने अपना पद छोड़ने की घोषणा करते हुए इस सूची पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने स्थानीय विधायक व प्रदेश सरकार के मंत्री को भी कटघरे में खड़ा किया है। दूसरी ओर, दो ऐसे नेता हैं जो पहले इसी क्षेत्रीय टीम में महत्वपूर्ण पद पर रह चुके हैं और इस बार उन्हें समायोजित करने के चक्कर में उनका पद ही घटा दिया गया है। वे अपने समर्थकों को कोई जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं। देवरिया जिले के पथरदेवा क्षेत्र के अम्बुज शाही ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है कि उन्हें दिया गया दायित्व अप्रासंगिक व अव्यवहारिक है। उनको क्षेत्रीय कार्यसमिति का सदस्य बनाया गया है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की है। वह बुद्ध पीजी कालेज कुशीनगर में छात्रसंघ अध्यक्ष रहे। जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए और वर्तमान में जिला सहकारी संघ लिमिटेड में निर्विरोध संचालक का दायित्व निभा रहे हैं। क्षेत्रीय कार्यसमिति में सदस्य पद की जिम्मेदारी मिलने पर उन्होंने अपना दुख सार्वजनिक किया है। उन्होंने लिखा है कि उन्हें इस पद के दायित्व से मुक्त कर दिया जाए। उन्होंने क्षेत्रीय अध्यक्ष को सुझाव भी दिया है कि कृषि मंत्री एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही के परामर्श से नया चयन कर लें।
अम्बुज शाही ने कहा कि उनसे जूनियर एवं कम अनुभव वाले नेताओं को जातीय समीकरण व क्षेत्रीय संतुलन को अनदेखा करते हुए जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने कहा कि इससे वह असहज महसूस कर रहे हैं। इन दो नेताओं का कद घटाया क्षेत्रीय कार्यसमिति में दो नाम चौंकाने वाले हैं। देवरिया के सज्जन मणि त्रिपाठी और मऊ के सुनील गुप्ता का नाम सभी की जुबान पर है। सुनील गुप्ता पिछली कार्यकारिणी में क्षेत्रीय महामंत्री का महत्वपूर्ण दायित्व निभा चुके हैं लेकिन इस बार उनका कद घटाते हुए उन्हें कार्यसमिति का सदस्य बना दिया गया है। वह मऊ के जिलाध्यक्ष भी रहे हैं और वर्तमान में देवरिया जिले के प्रभारी हैं।
इसी तरह सज्जन मणि त्रिपाठी क्षेत्रीय टीम में उपाध्यक्ष रह चुके हैं। उनके पास कार्यालय निर्माण विभाग के प्रदेश सह संयोजक का दायित्व भी है। उन्हें भी इस बार क्षेत्रीय कार्यसमिति का सदस्य बनाया गया है। अम्बुज शाही ने तो खुलकर अपनी बात रख दी है लेकिन ये दोनों नेता अभी चुप हैं। हालांकि उनके समर्थक इस पद को स्वीकार नहीं कर रहे और इसे कद घटाने से जोड़कर देख रहे हैं। जिस कार्यकारिणी में दोनों नेता महत्वपूर्ण पद पर काम कर चुके हैं, उसी में सबसे निचले पायदान पर काम करना होगा।

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