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झांसी में सरकारी नौकरी दिलाने के बहाने 59 लोगों से ठगी करने वाला गैंग बहुत ही शातिर तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाता था। स्वास्थ्य विभाग में नौकरी दिलाने के बहाने लोगों को बुलाया जाता था। यहां ब्रेनवॉश करके उनको ठगी के धंधे में उतारा जाता था। इसके लिए रोजाना एक घंटे की क्लास चलती थी। ‘सक्सेस बिल्डिंग प्रोग्राम’ भी चलाया जाता था। उनको लग्जरी जीवन के ख्वाब दिखाए जाते थे। ब्रेन वॉश होने की वजह से ही पीड़ित पुलिस के पास शिकायत लेकर नहीं जाते थे। मगर एक शिकायत के बाद पुलिस एक्टिव हुई। शनिवार को 4 थानों की पुलिस ने छापा मारकर 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। उनसे 8 मोबाइल, 8300 रुपए, ठगी से संबंधित दस्तावेज बरामद हुए हैं। 3 मंजिला बिल्डिंग किराए पर लिए थे शातिर जालसाजों ने राजगढ़ इलाके में तीन मंजिली पूरी इमारत किराए पर ली हुई थी। इनकी अलग-अलग मंजिलों में युवक-युवतियों को रखा गया था। एक कमरे में चार से पांच लोग रहते थे। पुलिस को देख यहां मौजूद अधिकांश युवक-युवतियां दंग रह गए। पुलिस ने ही उनको नौकरी के नाम पर हो रही ठगी के बारे में बताया। इसके बाद उनका रेस्क्यू हुआ। पूछताछ में पुलिस को मालूम चला कि जालसाज कंपनी की आड़ में नेटवर्क मार्केटिंग करते हैं। लोगों को जुटाने के लिए उनको नौकरी दिलाने का झांसा देते हैं। पहले 1100 रुपये लेकर उनको गुपचुप तरीके से कंपनी का सदस्य बना लेते हैं। ट्रेनिंग के नाम पर भी उनसे रकम वसूल ली जाती है। इसके बाद ब्रेन वॉश का दौर शुरू होता है। नियमित एक घंटे की क्लास चलती है। क्लास में सफल होने का लेक्चर देते थे पुलिस के मुताबिक आरोपी आलोक कुमार, लखन मेहता और मोहित क्लास लेते थे। इसमें लग्जरी जीवन और जल्द सफल होने की बात बताई जाती। उनको परिवार और परिचितों को नेटवर्क से जोड़ने को कहा जाता था। जालसाजों का तरीका ऐसा था कि युवक-युवतियों को यह भरोसा था कि इस ट्रेनिंग को पूरा करने के बाद उनको सरकारी नौकरी मिल जाएगी। पुलिस से भी इन लोगों ने यह बात बताई। उनको आसानी से बाहर भी जाने नहीं दिया जाता था। किसी के जिद करने पर बाकायदा लिखापढ़ी कराने के बाद ही जाने दिया जाता था। पुलिस के मुताबिक तीन युवकों को धीरे-धीरे धोखाधड़ी का अहसास हुआ। उन्होंने साइबर पुलिस को सूचना दी। इसी सूचना के आधार पर पुलिस ने गिरोह का भंडाफोड़ करके यहां मौजूद युवक-युवतियों का रेस्क्यू किया। कॉरपोरेट ऑफिस की आड़ में ठगी का खेल रेस्क्यू पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि करीब तीन महीने पहले उन्हें सरकारी नौकरी दिलाने के बहाने झांसी बुलाया गया था। प्रेमनगर इलाके में शानदार ऑफिस बनाया गया है। बाहर से देखने पर किसी कॉरपोरेट कंपनी के ऑफिस जैसा नजर आता था। इसी माहौल के जरिए युवाओं में कंपनी और उसके काम को लेकर भरोसा पैदा किया जाता था। पूछताछ में सामने आया कि अधिकांश युवक राजस्थान के टोंक और उसके आसपास के रहने वाले हैं। इनमें कई एक-दूसरे को पहले से जानते हैं, जबकि कुछ आपस में रिश्तेदार भी हैं। युवतियां प्रयागराज, बनारस एवं गाजीपुर की हैं। नौकरी की तलाश और परिचितों के भरोसे ये लोग झांसी पहुंचे थे। यहां आने के बाद उन्हें कंपनी की सदस्यता, ट्रेनिंग और सफलता के नाम पर नेटवर्क मार्केटिंग से जोड़ा गया। धीरे-धीरे उन्हें दूसरे लोगों को भी इसी तरह जोड़ने के लिए तैयार किया जाता था। वाराणसी और लखनऊ में पकड़ा जा चुका है गैंग इस गिरोह के तार वाराणसी एवं लखनऊ में पकड़े गए जालसाजों से जुड़े हैं। जुलाई महीने में बनारस में बरुआसागर के इटवा खुर्द गांव निवासी अभिषेक अहिरवार इस गिरोह के साथ पकड़ा गया था, जबकि मास्टरमाइंड भाग निकला था। एसएसपी विकास कुमार के मुताबिक पुलिस कार्रवाई के बाद ही गिरोह के लोगों ने झांसी को अपना नया ठिकाना बनाया और यहां से गतिविधियां शुरू कर दीं। झांसी में संचालित गिरोह का हैंडलर आलोक कुमार था। मुख्य मास्टरमाइंड का अभी पता नहीं चला है। जांच में मालूम चला कि वाराणसी में पकड़ी गई महादेव इंटरप्राइजेज नामक कंपनी से इन जालसाजों के तार जुड़े मिले। इसमें रॉयल हेल्थ इंडिया एवं रॉयल हेल्थ वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के सहारे भी ठगी हो रही थी। बिहार और झारखंड में कंपनी ने करीब 2500 लोगों को जोड़ने के बाद वाराणसी और लखनऊ को केंद्र बनाया था। मध्य प्रदेश की ओर बढ़ते हुए झांसी को नया केंद्र बना लिया। झांसी के रास्ते मध्य प्रदेश और इसके आगे के प्रदेशों में नेटवर्क फैलाने की कोशिश कर रहे थे। अभी तक की छानबीन में गिरोह का संचालक बिहार के जमुई गांव निवासी दीपक कुमार बताया जा रहा है। गिरोह के नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। ये लोग हुए गिरफ्तार रामसिंह मीणा पुत्र प्रकाश मीणा निवासी सिरसोली, टोंक, राजस्थान लखन मेहता पुत्र पवन मेहता निवासी कोयला, टोंक, राजस्थान बबलू पुत्र मुकेश कुमार निवासी पनिहाला, कोटपूतली, राजस्थान आलोक कुमार पुत्र सत्यदेव मंडल निवासी धर्मपुरा, जमुई, बिहार प्रयागराज पुत्र कमलेश प्रजापति निवासी देवरी, टोंक, राजस्थान मोहित वर्मा पुत्र ओमप्रकाश वर्मा निवासी राजमोर, थाना टोंक, राजस्थान सुरेन्द्र पुत्र रामदयाल निवासी राजमोर, टोंक, राजस्थान नितेश पुत्र रामचन्द्र जाट निवासी डूंसरी, टोंक, राजस्थान
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झांसी में ब्रेनवॉश करने के लिए रोजाना लगती थी क्लास:सरकारी नौकरी दिलाने के बहाने बुलाते थे, फिर ठगी के धंधे में उतार देते थे