जेल में एग्जाम में पास हुए कैदियों को मिला सर्टिफिकेट:शिक्षा के साथ करियर और रोजगार का दिया मार्गदर्शन


गोरखपुर के जिला कारागार में शनिवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान दार्शनिक और शिक्षाविद भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बंदियों को शिक्षा के महत्व के बारे में बताया गया। इस दौरान साक्षर हुए बंदियों को प्रमाण पत्र दिए गए, जबकि अगले बैच में पढ़ाई शुरू करने वाले निरक्षर बंदियों को शैक्षणिक किट वितरित की गई। देखिए 3 तस्वीरें… मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण से हुई शुरुआत कार्यक्रम की शुरुआत कारागार अधीक्षक दिलीप कुमार पाण्डेय ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित करके की। इसके बाद सिद्धदोष बंदी पप्पू राय और उनके सहयोगियों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। बंदियों ने देशभक्ति गीत भी प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों से जेल परिसर का माहौल उत्साह और देशभक्ति से भर गया। साक्षर हुए बंदियों को दिए गए प्रमाण पत्र बंदी सुधार और पुनर्वास अभियान के तहत शिव नाडर फाउंडेशन के सातवें बैच में साक्षर हुए बंदियों को कार्यक्रम में प्रमाण पत्र दिए गए। इन प्रमाण पत्रों का उद्देश्य बंदियों को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार करना है। इसके साथ ही आने वाले अष्टम बैच में शामिल होने वाले निरक्षर बंदियों को शैक्षणिक किट भी दी गई। इससे वे जेल में रहकर अपनी पढ़ाई की शुरुआत कर सकेंगे। रिहाई के बाद करियर को लेकर दिया मार्गदर्शन कार्यक्रम में कैरियर काउंसलर अमित आनंद ने बंदियों को संबोधित किया। उन्होंने रिहाई के बाद आगे की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए करियर और रोजगार से जुड़े विकल्पों की जानकारी दी। उन्होंने बंदियों को समझाया कि जेल से बाहर निकलने के बाद वे अपनी शिक्षा, हुनर और मेहनत के जरिए नई शुरुआत कर सकते हैं। शिक्षा और सही दिशा के जरिए जीवन में बदलाव लाया जा सकता है। शिक्षाविदों ने बंदियों को किया प्रेरित कार्यक्रम में कई शिक्षाविद और विशेषज्ञ भी मौजूद रहे। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. मोहम्मद हसन, राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के क्षसमन्वयक डॉ. प्रवीण कुमार, कैरियर काउंसलर अमित आनंद, सेंट्रल एकेडमी के प्रधानाहैचार्य डॉ. प्रदीप कुमार श्रीवास्तव और शिव नाडर फाउंडेशन के सहायक प्रबंधक कार्तिकेय पांडेय ने बंदियों को संबोधित किया। वक्ताओं ने बंदियों को शिक्षा, नैतिक मूल्यों और अच्छे आचरण के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति अपने प्रयासों से जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। बंदियों को जेल से बाहर निकलने के बाद समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर बेहतर जीवन शुरू करने के लिए प्रेरित किया गया। डॉ. राधाकृष्णन के जीवन से सीख लेने की अपील कारागार अधीक्षक दिलीप कुमार पाण्डेय ने अपने संबोधन में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन और उनके विचारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डॉ. राधाकृष्णन ने शिक्षा और दर्शन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने तिरुत्तनी में जन्म से लेकर ऑक्सफोर्ड में अध्यापन, सोवियत संघ में भारत के राजदूत के रूप में जिम्मेदारी निभाने और उनकी प्रसिद्ध पुस्तक द इंडियन फिलॉसफी सहित उनके कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पढ़ना-लिखना सीखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का सबसे मजबूत माध्यम भी है। बंदियों को शिक्षा से जुड़कर अपने जीवन को नई दिशा देने के लिए प्रेरित किया गया। अतिथियों को अंगवस्त्र देकर किया गया स्वागत कार्यक्रम में पहुंचे सभी विशिष्ट अतिथियों का कारागार अधीक्षक की ओर से अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान बंदियों की ओर से प्रस्तुत सांस्कृतिक और देशभक्ति कार्यक्रमों की भी सराहना की गई। जेल अधिकारियों और कर्मचारियों की रही मौजूदगी कार्यक्रम का मंच संचालन जेल विजिटर अमृताधीर मेहरोत्रा ने किया। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं की देखरेख कारागार अध्यापक राजीव चौरसिया ने की। इस अवसर पर जेलर कुंज बिहारी सिंह, उप जेलर विजय कुमार, आदित्य कुमार, कृष्णा कुमारी, कारागार अध्यापक राजीव चौरसिया सहित अन्य कारागार कर्मी मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में कारागार अधीक्षक ने सभी अतिथियों का आभार जताया और कार्यक्रम के समापन की घोषणा की। शिक्षक दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि शिक्षा और सही मार्गदर्शन के जरिए बंदियों को सुधार और पुनर्वास की दिशा में आगे बढ़ाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।

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