संभल की जिला टॉपर अपूर्वा का प्रोफेसर बनने का लक्ष्य:थर्ड टॉपर सागर गुप्ता का CA, सेकंड टॉपर खुशी-संजीव का लक्ष्य अभी पढ़ाई करना


यूपी बोर्ड के रिजल्ट में जनपद संभल का 83.54 प्रतिशत रिजल्ट रहा है। उत्तर प्रदेश में हमारा जनपद संभल 29 वें स्थान पर रहा है। यूपी की माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री गुलाब देवी की चंदौसी विधानसभा क्षेत्र के जगदीश सरन सर्राफ एसएसएमआईसी चंदौसी की अपूर्वा ने 92.80 प्रतिशत अंक प्राप्त कर जिला टॉप किया है। संजीव एवं ख़ुशी वार्ष्णेय ने 92.60 ने दूसरे और सागर गुप्ता ने 91.40 प्रतिशत अंक के साथ जनपद में तीसरे नंबर पर टॉप किया है। इंटरमीडिएट की टॉपर अपूर्वा पुत्री डॉ. श्रीनिवासन यादव ने कहा कि आप मेहनत करिए और आगे बढ़िए, आप सफल ज़रूर होंगे, बस लगातार मेहनत करते रहिए। मैं स्कूल पे डिपेंड थी, मेरे पापा ने मुझे गाइड किया और उन्होंने मुझे सबसे ज़्यादा सपोर्ट किया है। स्कूल का मेरे ऊपर बहुत ज़्यादा समय दिया, उन्होंने मुझे कुछ एक्स्ट्रा क्लास भी चलवाईं और उन्होंने समझाया कि कैसे-कैसे पढ़ाई करनी है। अपूर्वा ने कहा कि मैं प्रोफेसर बनना चाहती हूँ। सैकेंड टॉपर खुशी वार्ष्णेय ने कहा कि मैं स्पेशल में मास्टरमाइंड क्वेश्चन आंसर पढ़ा था, मैं अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने स्कूल को देना चाहूंगी। सेकंड टॉपर संजीव ने कहा कि मेरे पिता किसान है और उनके साथ खेती वाले का काम करता हूं स्कूल जाने के अलावा 6-7 घंटे ओर पढ़ता था। इंटरमीडिएट की थर्ड टॉपर संभल नगर पालिका परिषद के वार्ड संख्या 18 ठेर निवासी सागर गुप्ता पुत्र संजय गुप्ता ने बताया कि उनके पिता घर में ही छोटी सी जनरल दुकान चलाते हैं। मैंने इस वर्ष उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की कक्षा 12 की परीक्षाएँ दी थीं। आशा तो ज़्यादा लाने की थी, लेकिन यह भी बुरे नहीं हैं। मेरे हाईस्कूल में 94 प्रतिशत अंक आए थे, जिसमें मैंने अपने जनपद में तृतीय स्थान प्राप्त करा था। आज का भारत आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर हो रहा है, उसके लिए मुझे ऐसा लगता है कि एंटरप्रेन्योर्स की ओर ज़्यादा ज़रूरत है। फाइनेंस के एरिया में मेरे पास कॉमर्स थी, मुझे बहुत इंटरेस्ट है और मुझे लगता है फाइनेंस में इंडिया में बहुत ज़्यादा संभावनाएँ हैं, तो भविष्य में इसी क्षेत्र में संभावनाएँ दिखती हैं। सागर ने कहा कि जब एक विद्यार्थी कुछ अच्छी सफलता प्राप्त करता है, और विशेषकर परीक्षाओं में, तो उसमें मुझे लगता है कि उससे ज़्यादा उसके गुरुजनों का आशीर्वाद और माता-पिता का आशीर्वाद होता है। तो मुझे लगता है इसमें मैंने जितनी मेहनत करी है पूरे वर्ष, उससे कहीं ज़्यादा मेहनत मेरे लिए मेरे गुरुजनों ने करी है। मेरे माता-पिता के आशीर्वाद के द्वारा ही मैंने यह मुकाम हासिल करा है।

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