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श्रावस्ती के नासिरगंज कस्बे में 7 मुहर्रम की शाम इंसानियत और भाईचारे की मिसाल देखने को मिली। शिया समुदाय के बच्चों ने कर्बला के प्यासे शहीदों की याद में ‘सबील’ लगाकर राहगीरों और अकीदतमंदों को ठंडा पानी, शरबत और तबर्रुक वितरित किया। बच्चों द्वारा बड़े आदर और सम्मान के साथ की गई यह सेवा सभी के दिलों को छू गई। मुहर्रम में सबील लगाने की परंपरा कर्बला की उस घटना की याद दिलाती है, जब इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके 72 साथियों के लिए यज़ीदी फौज ने फरात नदी का पानी बंद कर दिया था। प्यास की उसी तीव्रता और कर्बला के शहीदों के बलिदान को याद करते हुए हर साल मुहर्रम के दिनों में सबील लगाई जाती है, ताकि हक, इंसानियत और सेवा का संदेश आम लोगों तक पहुंचे। नासिरगंज में बच्चों द्वारा लगाई गई इस सबील पर बड़ी संख्या में राहगीर और स्थानीय लोग रुके और पानी व शरबत ग्रहण किया। बच्चों ने पूरी विनम्रता और शालीनता के साथ हर आने-जाने वाले की सेवा की। स्थानीय नागरिकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में बच्चों द्वारा कर्बला के संदेश को समाज तक पहुंचाना मानवता और भाईचारे का बेहतरीन उदाहरण है। इस सबील के माध्यम से कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और लोगों को आपसी सौहार्द, सेवा भाव तथा इंसानियत का संदेश दिया गया। पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और अनुशासित माहौल में संपन्न हुआ, जिसने मुहर्रम की आध्यात्मिक भावना को और भी गहरा कर दिया।
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श्रावस्ती के नासिरगंज में बच्चों ने लगाई सबील:7 मोहर्रम पर कर्बला के शहीदों को याद, नन्हे हाथों में सेवा का पैगाम पिलाया पानी-शरबत