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अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर गुरुवार को जनपद में शिक्षकों ने 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से स्थायी राहत प्रदान किए जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपकर इस संबंध में आवश्यक विधायी कार्रवाई की मांग की। कार्यक्रम का नेतृत्व महासंघ के जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंह चौहान ने किया। ज्ञापन में कहा गया कि उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों की सेवाएं उस समय लागू नियमों, मानकों एवं चयन प्रक्रिया के अनुरूप विधिवत रूप से की गई थीं। ऐसे शिक्षक वर्षों से विद्यालयों में अपनी सेवाएं देते हुए विद्यार्थियों के शैक्षिक विकास, चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान निभा रहे हैं। जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंह चौहान ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा 23 अगस्त 2010 को टीईटी को न्यूनतम अर्हता घोषित किया गया था। इससे पहले बड़ी संख्या में शिक्षक वैध रूप से नियुक्त हो चुके थे। उन्होंने कहा कि टीईटी लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को बाद में लागू की गई अर्हता के आधार पर प्रभावित करना न्यायोचित नहीं है। संगठन देशव्यापी आंदोलन करने को बाध्य होगा महासंघ के जिला महामंत्री इलियास मंसूरी ने कहा कि संगठन सर्वोच्च न्यायालय के 29 मई 2026 के निर्णय का पूर्ण सम्मान करता है, लेकिन लाखों शिक्षकों के हितों और उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार तथा संसद को आवश्यक कदम उठाने चाहिए। उन्होंने मांग की कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम में संशोधन अथवा विशेष प्रावधान के माध्यम से 23 अगस्त 2010 से पूर्व तथा उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी राहत प्रदान की जाए। महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि शिक्षकों की इस मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन देशव्यापी आंदोलन करने को बाध्य होगा। इस दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक एवं संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे।
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शिक्षकों का प्रदर्शन, टीईटी अनिवार्यता से राहत की मांग:जालौन में 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को स्थायी छूट देने की अपील