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शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने 13 गुर्जरों को लाइन में खड़ा कर गोलियों से भून देने वाले कुख्यात डकैत को अपना दोस्त बताया। उन्होंने लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की जयंती के अवसर पर डकैत रामबाबू गड़रिया की तस्वीर पर पुष्प अर्पित किए। भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने कहा- हम एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी थे। रामबाबू की परिस्थितियों को मैं अच्छी तरह जानता था। समाज के कुछ लोगों ने उसे इतना प्रताड़ित किया कि वह डकैत बनने पर मजबूर हो गया। अन्यथा रामबाबू ऐसा व्यक्ति नहीं था, जो डकैत बनता। प्रीतम लोधी ने ये बातें शिवपुरी जिले के पिछोर में आयोजित पाल-बघेल समाज के कार्यक्रम में कहीं। कार्यक्रम में लोकगायक मनोज बघेल भी मौजूद रहे। समारोह में समाज के हजारों लोग शामिल हुए। विधायक के इस बयान के बाद एक बार फिर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रीतम लोधी इससे पहले भी अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं। हाल ही में उन्होंने करैरा के SDOP डॉ. आयुष जाखड़ को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था- करैरा तेरे डैडी का नहीं है, एसडीओपी। करैरा आएगा और चुनाव भी लड़ेगा। अगर तेरे डैडी में दम हो तो रोक लेना।
विधायक बोले- क्या डकैत और गुंडे इंसान नहीं होते? प्रीतम लोधी ने मंच से कहा- एक बहन पर बहुत अत्याचार हुआ था। उस समय मैंने उसकी आवाज उठाई थी। पांच हजार लोगों के साथ कमिश्नरी का घेराव किया था। उस दौर में लोगों को सिर्फ इतना दिखाई देता था कि एक गुंडा एक डकैत का सहयोग कर रहा है, लेकिन क्या डकैत और गुंडे इंसान नहीं होते? उन्होंने आगे कहा- रामबाबू गड़रिया परिस्थितियों का शिकार था। उसकी परिस्थितियां मुझे अच्छी तरह मालूम थीं। समाज के कुछ लोगों ने उसे इतना परेशान किया कि वह डकैत बनने पर मजबूर हो गया। अन्यथा रामबाबू ऐसा व्यक्ति नहीं था, जो डकैत बनता। हमारी मुलाकात जेल और जंगल में हुई थी विधायक ने कहा कि उन्हें रामबाबू के जीवन से जुड़ी कई घटनाएं आज भी याद हैं। मुझे उसकी जेल से लेकर जंगल तक की एक-एक बात याद है। हमारी मुलाकात जेल में भी हुई थी और जंगल में भी हुई थी। मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूं कि रामबाबू गड़रिया की तस्वीर पर माल्यार्पण करने का अवसर मिला। जिस तरह रामबाबू का साथ दिया, वैसे ही पाल-बघेल समाज का भी साथ दूंगा विधायक ने कहा- जिस तरह मैंने रामबाबू के परिवार का साथ दिया था, उसी तरह आज मैं शपथ लेता हूं कि पाल-बघेल समाज का भी साथ दूंगा। कभी पीछे नहीं हटूंगा। हमारी संस्कृति न अत्याचार करने की है और न अत्याचार सहने की। हमारी पहचान यही है कि न अन्याय करेंगे और न अन्याय सहेंगे। विधायक ने कहा- जब मैंने रामबाबू का साथ दिया था, तब मेरा हाथ ढाई किलो का था। अब आप लोगों ने उसे बढ़ाकर ढाई सौ किलो का कर दिया है। आपकी रक्षा और सुरक्षा के लिए प्रीतम लोधी का ढाई सौ किलो का हाथ हमेशा तैयार रहेगा। दीप से दीप जलाते चलो, पिछोर में प्रेम की गंगा बहाते चलो। रामबाबू कैसे बना था कुख्यात डकैत ? रघुवर गड़रिया, रामबाबू गड़रिया, दयाराम, गोपाल और प्रताप सभी से रिश्तेदारी थी। रामबाबू तो परिवार का सदस्य था, लेकिन 1998 में रघुवर की पत्नी को लेकर एक विवाद हुआ। इससे नाराज होकर रघुवर, रामबाबू और दयाराम एक रिश्तेदार की हत्या कर फरार हो गए। गांव में तनाव बढ़ गया। ग्वालियर के तत्कालीन एसपी प्रदीप रुनवाल ने गांव का दौरा किया। इसके बाद गांव में पुलिस ने सुरक्षा देने 4 जवानों की तैनाती कर दी, लेकिन रघुवर, रामबाबू और दयाराम परिवार के एक और सदस्य की हत्या करने में सफल हो गए। इसके बाद परिवार ने गांव छोड़ दिया था। ………………………………………… यह खबर बी पढ़ें 1. एनकाउंटर में 3 बार मर चुके डकैत की कहानी आज से ठीक 24 साल पहले। 8 जनवरी 1999 को पुलिस ने दुर्दांत डकैत रामबाबू गड़रिया का पहला एनकाउंटर किया था। पुलिस ने रामबाबू की डेडबॉडी का पोस्टमार्टम कराकर अंतिम संस्कार भी करा दिया। लेकिन चार महीने बाद रामबाबू गड़रिया के जिंदा होने की खबर मिली। खुलासा तब हुआ जब एक अपहृत शख्स उसकी गिरफ्त से रिहा होकर घर लौटा। पढ़ें पूरी खबर… BJP विधायक प्रीतम लोधी पर भड़के MP के IPS मध्य प्रदेश में शिवपुरी के पिछोर से BJP विधायक प्रीतम सिंह लोधी की टप्पणी से IPS एसोसिएशन नाराज है। SDOP डॉ. आयुष जाखड़ को ‘करैरा तेरे डैडी का नहीं है एसडीओपी’ कहने पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। एसोसिएशन ने सख्त कार्रवाई की मांग की है। पढ़ें पूरी खबर…
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विधायक ने 13 गुर्जरों के हत्यारे डकैत को बताया दोस्त:लाइन में खड़ाकर गोलियों से भूना था; फूल चढ़ाकर प्रीतम लोधी बोले-हम सुख-दुख के साथी थे