![]()
लखनऊ के नवयुग कन्या महाविद्यालय में स्वामी करपात्री महराज के प्राकट्योत्सव पर आयोजित प्रतियोगिताओं का शुक्रवार कों समापन हो गया। यह आयोजन आचार्य शंकर भारतोद्भासक मंडल और महाविद्यालय के संस्कृत एवं हिंदी विभाग के सहयोग से किया गया । इस मौके पर पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद गोस्वामी तुलसीदास और स्वामी करपात्री महराज की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया गया। मुख्य अतिथि मनोज ने कहा कि तुलसीदास की वाणी हमें मर्यादा का मार्ग दिखाती है, जबकि स्वामी करपात्री महराज का जीवन धर्मनिष्ठा की प्रेरणा देता है। युवा पीढ़ी इन दोनों महापुरुषों के जीवन से सीख ले सकती है। भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण आवश्यक उन्होंने कहा कि ज्ञान-विज्ञान को अपनाने के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना भी जरूरी है। भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन में युवाओं को योगदान देना चाहिए। महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. मंजुला उपाध्याय ने कहा कि तुलसीदास ने बताया कि महानता केवल ज्ञान से नहीं, बल्कि चरित्र और आचरण से आती है। स्वामी करपात्री जी ने संस्कृति और शास्त्रों के अध्ययन को श्रद्धा के साथ विवेक और तर्क से समझने की प्रेरणा दी। शंकर उद्भासक मंडल के प्रमुख रामबाबू पांडे ने कहा कि तुलसीदास ने भगवान राम के चरित्र को जन-जन तक पहुंचाया। वहीं स्वामी करपात्री जी ने धर्म, सत्य, मर्यादा और लोकमंगल की परंपरा की वैचारिक रक्षा की।कार्यक्रम संयोजिका प्रो. वंदना द्विवेदी ने आयोजन की रूपरेखा बताई। महासचिव डॉ. विशाल शुक्ला ने स्वामी करपात्री जी के जीवन, चरित्र और कृतियों पर विचार रखे। निबंध, चित्रकारी और भाषण प्रतियोगिता के विजेताओं को प्रथम पुरस्कार के रूप में 3000, द्वितीय को 2000, तृतीय को 1000 और सांत्वना पुरस्कार के रूप में 500 रुपए दिए गए। सभी विजेताओं को प्रमाण पत्र और स्मृति चिह्न भी प्रदान किए गए।
Source link
लखनऊ में स्वामी करपात्री महाराज प्राकट्योत्सव:ज्ञान-विज्ञान को अपनाने और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने की सीख