लखनऊ में यूपी साहित्य सभा का 5वां स्थापना दिवस:समारोह में साहित्य, संस्कृति और सम्मान का संगम, पत्रिका का विमोचन


लखनऊ के गोमती नगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्थान में उत्तर प्रदेश साहित्य सभा का पांचवां स्थापना दिवस समारोह ‘आश्वस्ति’ आयोजित किया गया। इस अवसर पर साहित्य, संस्कृति और सम्मान का संगम देखने को मिला।प्रदेशभर से आए कवियों और साहित्यकारों ने हिंदी साहित्य के संरक्षण और संवर्धन का संकल्प लिया। कार्यक्रम में गायक किशोर कुमार के लोकप्रिय गीतों की मधुर प्रस्तुतियां भी दी गईं । समारोह के मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने साहित्यिक पत्रिका ‘आश्वस्ति’ का विमोचन किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि समाज को संस्कार और आधुनिक शिक्षा के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना चाहिए। पाठक ने सनातन संस्कृति के अध्ययन पर जोर देते हुए बच्चों को बेहतर शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार देने को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया। प्रतिष्ठित साहित्यकारों को सम्मानित किया गया इस अवसर पर कई प्रतिष्ठित साहित्यकारों और संस्थाओं को सम्मानित किया गया।वयोवृद्ध कवि शिवभजन कमलेश को काव्यसिद्धि सम्मान, शारदालाल को साहित्यसिद्धि सम्मान, चेतना साहित्य परिषद को सार्थक संस्था सम्मान, ऋचा खन्ना को साहित्य उन्नयन सम्मान, रेहान सिद्दीकी को भाषा समन्वय सम्मान, रमेश मंगल वाजपेई को लोक साहित्य उन्नयन सम्मान और दीपक शर्मा सार्थक को नवोन्मेष साहित्य सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम के दौरान, वर्तमान अध्यक्ष शिवओम अम्बर ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष बलराम श्रीवास्तव को संस्था की जिम्मेदारी सौंपी। शिवओम अम्बर ने विद्यालयों में हिंदी भाषा के घटते प्रभाव पर चिंता व्यक्त की और सरकार से इस दिशा में ठोस व सकारात्मक कदम उठाने की अपील की। साहित्यकारों को जोड़ने का एक मजबूत मंच स्वागत भाषण डॉ. विष्णु सक्सेना ने दिया।संस्था के प्रधान सर्वेश अस्थाना ने कहा कि उत्तर प्रदेश साहित्य सभा साहित्यकारों को जोड़ने का एक मजबूत मंच बन रही है।उन्होंने विभिन्न भाषा अकादमियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्हें अधिक सक्रिय बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। समारोह में डॉ. रुद्रमणि को चिकित्सक साहित्य सभा का संयोजक और ऋचा खन्ना को विद्यार्थी साहित्य सभा का संयोजक नियुक्त किया गया।इस अवसर पर स्वतंत्र प्रकाश गुप्त, ललित मुद्गल, मुकेश बहादुर सिंह, डॉ. विद्याबिंदु सिंह, डॉ. सूर्यप्रसाद दीक्षित, शिवओम अम्बर और प्रवीण शुक्ल सहित कई अन्य साहित्यकारों ने भी साहित्य, भाषा और संस्कृति से जुड़े विषयों पर अपने विचार साझा किए।

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