भातखण्डे विश्वविद्यालय में संस्थापक की जयंती मनाई गई:विद्यार्थियों ने राग, ताल और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं


लखनऊ का भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय सोमवार को राग, ताल और नृत्य की त्रिवेणी से सराबोर हो उठा। मौका था आधुनिक भारत में हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के पुनर्जागरण के अग्रदूत और महान संगीत मनीषी पंडित विष्णु नारायण भातखण्डे की जयंती का। गरिमामय और उत्साहपूर्ण माहौल में आयोजित यह कार्यक्रम भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा, श्रद्धा और समर्पण का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा। समारोह का औपचारिक शुभारंभ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके बाद विश्वविद्यालय के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक और शैक्षणिक प्रस्तुतियां देकर हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया। समूह ने मंच पर ख्याल की बेहद सधी हुई प्रस्तुति दी संगीत संध्या का पहला सुर राग जौनपुरी के साथ सजा। संगीत शिक्षक कैलाश जोशी के मार्गदर्शन में तैयार 6 विद्यार्थियों के समूह ने मंच पर बड़ा ख्याल और छोटा ख्याल की बेहद सधी हुई प्रस्तुति दी। रागों की इस यात्रा को आगे बढ़ाते हुए अभिषेक त्रिपाठी के निर्देशन में 10 विद्यार्थियों ने राग बिहाग में छोटा ख्याल पेश किया। जैसे ही विद्यार्थियों के सुरों से ‘नमो नमो श्री चतुर चरण नित’ के बोल फिज़ा में घुले, पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। यह ऐतिहासिक बंदिश पंडित श्रीकृष्ण नारायण रातंजनकर ने भातखण्डे की प्रशंसा में रची थी। कथक की पदचाप की मनमोहक छटा बिखेरी समारोह का मुख्य आकर्षण इंद्रधनुष शीर्षक से प्रस्तुत समापन प्रस्तुति रही। इसका शानदार संगीत और नृत्य निर्देशन गुरु असीम बंधु भट्टाचार्य ने किया था। वरिष्ठ गुरु पं. राम मोहन महाराज और डॉ. रुचि खरे द्वारा प्रशिक्षित विद्यार्थियों ने जब मंच पर कथक की पदचाप और चक्करों की मनमोहक छटा बिखेरी, तो दर्शक टकटकी बांधे देखते रह गए। पंडित विष्णु नारायण भातखण्डे ने अपना संपूर्ण जीवन हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत को संगठित करने और उसे वैज्ञानिक आधार देने में समर्पित कर दिया था। उनकी महान ग्रंथ-रचनाएं आज भी संगीत जगत में शिक्षा और साधना की मुख्य आधारशिला बनी हुई हैं। समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने कहा कि भातखण्डे ने शास्त्रीय संगीत को संरचित स्वरूप देकर संस्थागत शिक्षण प्रणाली की मजबूत नींव रखी थी।

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