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लखनऊ में मंगलवार को देर रात हजरत कासिम की मेहंदी का जुलूस निकाला गया। जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोग शामी हुए। 7 मोहर्रम को हुसैनाबाद ट्रस्ट की निगरानी में पारंपरिक अंदाज में मेहंदी का जुलूस निकला। ‘रो-रो के खेमे में जैनब पुकारी…आज मेहंदी है कासिम तुम्हारी…घर में बैठी है दुल्हन बेचारी आज मेहंदी है कासिम तुम्हारी’ नोहे की धुन सुनकर लोगों ने नम आंखों से हजरत कासिम को याद किया। नवाब मसूद अब्दुल्ला ने कहा कि इस इस जुलूस की शुरुआत अवध के तीसरे ताजदार बादशाह मोहम्मद अली शाह ने 1839 में किया था। 187 सालों से ये परंपरागत जुलूस निकल रहा है । पहली मोहर्रम को शाही जारी का जुलूस भी इन्होंने ही शुरू किया था। लोगों की डिमांड पर यह जुलूस शुरू किया गया था। हजरत इमाम हुसैन के भतीजे हजरत कासिम की याद में जुलूस निकाला जाता है। नवाबीन-ए-अवध ने सोचा था कि अगर किसी शहजादे की शादी होगी उसमें जो जुलूस निकलेगा उसकी क्या शान-ओ-शौकत होगी उसी को ध्यान में रखकर यह शाही जुलूस तैयार किया गया। जुलूस में 1 हाथी, 10 ऊंट, दर्जनों की संख्या में हाथ मे लाल, हरा, नीला और पीला झंडा लेकर लोग जुलूस में शामिल हुए। मेहंदी के जुलूस में परंपरागत धुन बजाई गई। मेहंदी के जुलूस में लकड़ी के ताजिया शामिल किए गए। जुलूस में 12 प्रकार की विशेष थाल सजाई गई। पैदल मार्च करते हुए लोग या हुसैन की सदा लगाते हुए निकले।
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लखनऊ में निकला 187 पुराना मेहंदी का जुलूस:बड़ा इमामबाड़ा से बड़ा इमामबाड़ा तक दिखा शाही अंदाज , हाथी – ऊंट पर सवार हुए अकीदत मंद