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लखनऊ के सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, निराला नगर में चल रहे आचार्य विकास वर्ग के द्वितीय दिवस का शुभारंभ योगाभ्यास से हुआ। वरिष्ठ आचार्य विनोद कुमार शुक्ल ने सभी प्रतिभागियों को योग का अभ्यास कराया। इसके बाद वंदना सत्र में शिक्षा और संस्कार आधारित शिक्षण पद्धति पर विस्तार से चर्चा की गई। वंदना सत्र में क्षेत्रीय सह प्रशिक्षण प्रमुख कमलेश सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान सप्तशती संगम की प्रमुख निधि द्विवेदी, संकुल प्रमुख देवेंद्र कुमार शुक्ला और संतोष सिंह सहित विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य, आचार्य और आचार्या बहनें मौजूद रहीं। पंचपदी शिक्षण पद्धति की विस्तृत जानकारी दी मुख्य वक्ता कमलेश सिंह ने प्रोजेक्टर के माध्यम से पंचपदी शिक्षण पद्धति की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पद्धति विद्यार्थियों को विषय की गहराई से समझ विकसित करने में सहायक है। सिंह ने शिक्षकों से कक्षा शिक्षण में इस पद्धति का प्रभावी उपयोग करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में मॉडल हाउस के प्रधानाचार्य शैलेंद्र सिंह और पूर्णकालिक शिक्षा सेवा संयोजक सुरेश मणि भी उपस्थित रहे। शैलेंद्र सिंह ने शिशु दैनंदिनी और आचार्य दैनंदिनी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इनके माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और परिणामकारी बनाया जा सकता है। पाठ योजना तैयार करने की प्रक्रिया को प्रोजेक्टर के माध्यम से समझाया द्वितीय सत्र में सेक्टर-क्यू के अंग्रेजी आचार्य गंगाधर द्विवेदी ने पंचपदी शिक्षण पद्धति के आधार पर पाठ योजना तैयार करने की प्रक्रिया को प्रोजेक्टर के माध्यम से समझाया। उनके प्रस्तुतीकरण को प्रतिभागियों ने काफी सराहा। सायंकालीन सत्र पूरी तरह क्रियात्मक रहा। संकुल प्रमुखों के मार्गदर्शन में सभी आचार्यों ने स्वयं लेसन प्लान तैयार किए और शिक्षण की व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा की। इसके बाद संतोष सिंह ने एक संवादात्मक सत्र के माध्यम से शिक्षकों के अनुभव और सुझाव साझा कराए। दिन के अंतिम सत्र में पटेल नगर की प्रधानाचार्या निरुपमा ने बोधकथा के माध्यम से शिक्षकों को मूल्यपरक शिक्षा के विभिन्न आयामों से परिचित कराया।
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लखनऊ में आचार्य विकास वर्ग का दूसरा दिन:योग से शुरू, पंचपदी शिक्षण पद्धति पर गहन चर्चा