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रिहंद जलाशय से पानी पर शुल्क वसूली के अधिकार को लेकर सरकार हाईकोर्ट में स्पष्ट जवाब नहीं दे सकी। इस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने नाराजगी जताते हुए मुख्य सचिव सहित चार वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने हिंडाल्को इंडस्ट्रीज की याचिका पर यह आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को निर्धारित की गई है। मुख्य सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होंगे, जबकि सिंचाई और ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिवों तथा यूपी राज्य विद्युत उत्पादन निगम के प्रबंध निदेशक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि तत्कालीन उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड, उत्तर प्रदेश जल विद्युत निगम या यूपीआरवीयूएनएल को हिंडाल्को से पानी का शुल्क वसूलने और बिल जारी करने का अधिकार किस नियम के तहत मिला था। साथ ही, यह भी स्पष्ट करने को कहा गया था कि रिहंद जलाशय के पानी पर राज्य सरकार का स्वामित्व है या नहीं। अदालत ने कहा कि 2 जुलाई के आदेश में पूछे गए सवालों का सरकार ने अब तक स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। इसी पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कोर्ट ने वरिष्ठ अधिकारियों को अगली सुनवाई में पूरी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया। यह मामला पहले सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। हालांकि, बाद में अदालत के सामने राज्य सरकार द्वारा रखे गए पक्ष और सरकारी अभिलेखों में दर्ज तथ्यों में अंतर सामने आया। इसके बाद कोर्ट ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था।
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रिहंद जलाशय के पानी पर शुल्क वसूली का अधिकार किसे?:सरकार के जवाब से हाईकोर्ट नाराज, मुख्य सचिव समेत 4 अफसर तलब