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रामपुर में श्राद्ध पक्ष में पितरों की मुक्ति एवं शांति की भावना से वृद्ध आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ कथा का श्रवण किया। कथा व्यास आचार्य पंडित श्री मुमुक्षु कृष्ण दद्दा जी महाराज ने राजा परीक्षित को श्रीशुकदेव जी द्वारा श्रीमद्भागवत कथा सुनाए जाने के सुंदर प्रसंगों का वर्णन किया। कथा व्यास ने बताया कि राजा परीक्षित को जब ज्ञात हुआ कि शाप के कारण उनके जीवन के केवल सात दिन शेष हैं, तब उन्होंने राजपाट का त्याग कर गंगा तट पर पहुंचकर ऋषि-मुनियों से पूछा कि मनुष्य को मृत्यु के निकट पहुंचने पर क्या करना चाहिए। इसी समय महान संत श्रीशुकदेव जी वहां पहुंचे। राजा परीक्षित ने उनसे भगवान की प्राप्ति का मार्ग बताने तथा अंतिम समय में सुनने योग्य कथा सुनाने का आग्रह किया। श्रीशुकदेव जी ने राजा परीक्षित को समझाया कि मनुष्य को जीवन की नश्वरता को समझते हुए अपना मन भगवान के चरणों में लगाना चाहिए। उन्होंने भगवान के नाम-स्मरण, सत्संग और श्रीहरि की कथा के श्रवण को जीवन का आधार बताते हुए कहा कि जब मनुष्य सांसारिक मोह से ऊपर उठकर भगवान का चिंतन करता है तो उसके भीतर भय और चिंता का स्थान श्रद्धा एवं भक्ति ले लेती है। इसी क्रम में श्रीशुकदेव जी ने भगवान की विभिन्न लीलाओं और भक्तों पर उनकी कृपा के प्रसंग सुनाए। राजा परीक्षित पूरी एकाग्रता और श्रद्धा के साथ कथा सुनते रहे। कथा के इन प्रसंगों का वर्णन सुनकर वृद्ध आश्रम में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। कथा से पूर्व मुख्य यजमान उषा मेहंदीरत्ता ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। इस अवसर पर विष्णु शरण अग्रवाल, सुधाकर सिंह, गंगा शरण यादव, शंकर, अमित कुमार, गोपाल शंकर श्रीवास्तव, विकास सहित गोसेवा गोपाल सेवा समिति के अध्यक्ष संदेश अग्रवाल उपस्थित रहे। इससे पूर्व वृद्ध आश्रम में जे.के. श्रीवास्तव के सौजन्य से भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे में वृद्ध आश्रम में माता-पिता के समान रह रहे सभी बुजुर्गों ने प्रसाद ग्रहण किया।
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रामपुर वृद्ध आश्रम में भागवत कथा:परीक्षित और शुकदेव प्रसंग सुनाया, बुजुर्गों ने भंडारे में प्रसाद पाया