राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली के विरोध में वकीलों का प्रदर्शन:तहसील स्तर पर लंबित समस्याओं को लेकर उठाई आवाज, न्यायिक कार्य का बहिष्कार


देवरिया में सदर तहसील बार एसोसिएशन के वकीलों ने शुक्रवार को राजस्व न्यायालयों और तहसील स्तर पर लंबित समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किया। वकीलों ने सुबह 11 बजे तहसील परिसर में इकट्ठा होकर अपना विरोध जताया। इससे पहले तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष युगुलकिशोर तिवारी की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी, जिसमें न्यायिक कार्य का बहिष्कार करने और प्रदर्शन करने का फैसला लिया गया। वकीलों का कहना है कि राजस्व कर्मचारियों की लापरवाही से खतौनी और राजस्व रिकॉर्ड में लगातार गलतियां बनी रहती हैं। धारा 33/32 से जुड़े मामलों में लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं होती, जिससे आम जनता और वादकारियों को बहुत दिक्कत होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि रिकॉर्ड ठीक कराने में कई बार महीनों से लेकर एक साल तक का समय लग जाता है। बैठक में तहसील न्यायालयों में लंबित मुकदमों के निपटारे की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए। वकीलों ने आरोप लगाया कि कई मामलों में सुनवाई पूरी होने के बाद भी लंबे समय तक कोई आदेश नहीं आता। बाद में उन मामलों को दोबारा बहस के लिए लगा दिया जाता है। मुकदमों का पोर्टल पर समय से रजिस्ट्रेशन नहीं होने से भी उनके निपटारे में देरी होती है। समस्याओं के जल्द समाधान की मांग की वकीलों ने एनटीडी और आरके कार्यालय में फाइलों के गायब होने या उनमें गड़बड़ी की शिकायतों को भी गंभीर बताया। इसके अलावा, तहसील कार्यालयों में अक्सर दस्तावेज लॉक हो जाते हैं, जिससे खतौनी से जुड़े काम पर असर पड़ता है। वकीलों ने एडवोकेट एक्ट, 1961 में प्रस्तावित संशोधन और अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम को प्रदेश में जल्द लागू करने की मांग की। उन्होंने तहसील परिसर में प्रदर्शन कर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाई। इस संबंध में एक प्रस्ताव की कॉपी ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सदर और शासन को भेजी गई है, जिसमें समस्याओं के जल्द समाधान की मांग की गई है। इस प्रदर्शन के दौरान राकेश कुमार शाही, अजय कुमार, राजाराम प्रसाद, रामदविला, समित कुमार मिश्रा, विनोद सिंह, विष्णु प्रकाश गुप्ता, गिरिश नारायण तिवारी, पंकज सिंह, रविंद्र यादव, अनवर जमाल, रामशरण यादव, विवेकानंद, सुनील चौहान, रामनिवास यादव, अजय श्रीवास्तव, बेचू चौहान, राजेश कुमार सिंह (मन्नू), संतोष सिंह, अम्बरीष मणि त्रिपाठी, राधेश्याम पटेल और बृजपाल यादव समेत कई अन्य वकील मौजूद थे।

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