यूपी में मच्छरदानी लगाकर पेट्रोल पंप पर सो रहे लोग:पेट्रोल-डीजल बढ़ी कीमतों और किल्लत का असर, पुलिस सुरक्षा में बंट रहा


यूपी में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और किल्लत का असर दिखने लगा है। महराजगंज में सोमवार रात से ही लोग पेट्रोल पंपों के बाहर मच्छरदानी लगा के सो रहे हैं। जिले में ज्यादातर पेट्रोल पंप बंद पड़े हैं। शहर में मुख्यालय के सिर्फ एक पेट्रोल पंप पर तेल मिल रहा है। वहीं, बस्ती में बाइक सवारों को 200 रुपए का तेल और कार वालों को 1000 रुपए का ही तेल दिया जा रहा है। संतकबीर नगर, श्रावस्ती, बहराइच समेत कई जिलों में परेशानी देखने को मिल रही है। यूपी में राज्य स्तरीय समन्वयक (Oil Industry UP) के अनुसार, राज्य में हर दिन लगभग 20 लाख लीटर पेट्रोल और 33 लाख लीटर डीजल की खपत होती है। इसके मुकाबले डिपो में 15 से 20 दिनों का बफर स्टॉक सुरक्षित रहता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में जारी भारी उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच सरकारी तेल कंपनियों ने मंगलवार सुबह पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 90 पैसे प्रति लीटर की और बढ़ोतरी कर दी है। एक हफ्ते से भी कम समय में ईंधन के दामों में यह दूसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले पिछले शुक्रवार को ही कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं… डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर आम आदमी की जेब और किचन पर पड़ता है। इसे ऐसे समझिए: मालभाड़ा बढ़ेगा: ट्रक और टेम्पो का किराया बढ़ जाएगा, जिससे दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन महंगे हो जाएंगे। खेती की लागत: ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए किसानों को ज्यादा खर्च करना होगा, जिससे अनाज की लागत बढ़ेगी। बस-ऑटो का किराया: सार्वजनिक परिवहन और स्कूल बसों के किराए में भी इजाफा देखने को मिल सकता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी? इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। तेल कंपनियों को हर महीने 30 हजार करोड़ का घाटा हो रहा था सरकार के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घाटे में चल रही थीं । पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के अनुसार कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमत से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए….

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