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उत्तर प्रदेश की मंडियों में सरकार का एक नया तकनीकी नियम व्यापारियों के लिए जी का जंजाल बन गया है। राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद द्वारा लागू की गई जियो वाहन टैगिंग व्यवस्था और गेट पास की बेहद कम समय-सीमा के विरोध में बुधवार को सूबे के व्यापारी भड़क उठे। इस ‘तुगलकी’ आदेश से नाराज गल्ला, सब्जी और किराना मंडियों के सैकड़ों व्यापारी लखनऊ के गोमती नगर स्थित मंडी परिषद कार्यालय पहुंचे और जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने मंडी निदेशक इंद्रविक्रम सिंह को एक चार सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर इस व्यवस्था को तुरंत वापस लेने की मांग की है। करोड़ों किसानों और 25 लाख दुकानदारों पर पड़ेगा असर भारतीय कृषि उत्पाद उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र ने प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए कहा कि इस अव्यावहारिक फैसले से प्रदेश के 73 हजार थोक व्यापारी और 25 लाख से अधिक फुटकर कारोबारी सीधे प्रभावित होंगे। यही नहीं, मंडियों से जुड़े करोड़ों किसानों पर भी इसका बुरा असर पड़ेगा। जब ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे व्यापारी इस जटिल तकनीकी व्यवस्था में उलझेंगे, तो वे किसानों की उपज समय पर नहीं खरीद पाएंगे। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ या ‘ईज ऑफ हैरासमेंट’? व्यापारियों का कहना है,कि सूबे की 251 गल्ला मंडियों में पहले से ही 6-आर, 9-आर, गेट पास और प्री-अराइवल स्लिप की ऑनलाइन व्यवस्था चल रही है। जब सारी जानकारी पहले से ही पोर्टल पर है, तो 1 जुलाई 2026 से लागू की गई यह समानांतर जियो-टैगिंग व्यवस्था सिर्फ व्यापारियों का उत्पीड़न बढ़ाएगी। नए नियम के तहत माल लादते और उतारते समय हर बार गाड़ी की फोटो खींचकर ऐप पर टैग करना होगा। छोटे वाहन जो ट्रांसपोर्ट नगर में माल पलटते हैं, उनके लिए यह व्यावहारिक रूप से असंभव है और जरा सी चूक होने पर सीधे भारी जुर्माने का प्रावधान कर दिया गया है। गेट पास की समय-सीमा और पार्टनरशिप नियमों पर भी घमासान संगठन के पदाधिकारियों अजय वाजपेयी, बनवारीलाल गुप्ता और कृष्ण कुमार गुप्ता ने बताया कि एक जिले से दूसरे जिले माल ले जाने वाले गेट पास की समय-सीमा इतनी कम है कि जाम या गाड़ी खराब होने पर भी व्यापारियों पर जुर्माना ठोक दिया जाता है, जबकि मंडी शुल्क चोरी की कोई संभावना नहीं होती। इसके अलावा पिछले साल लागू किया गया प्रोपराइटरशिप फर्म को पार्टनरशिप में बदलने का नियम भी अत्यंत जटिल है। नए नियम के अनुसार पार्टनर बनने के लिए दुकान की अधिकतम बोली का 51 प्रतिशत जमा करना अनिवार्य है, जिसकी वजह से आज तक पूरे प्रदेश में एक भी आवेदन नहीं हो सका है। व्यापारियों ने जीएसटी की तर्ज पर नए लाइसेंस हेतु गारंटर की व्यवस्था खत्म करने और कागजी कार्रवाई कम करने की मांग भी उठाई। मंडी निदेशक ने दिया सरलीकरण का भरोसा व्यापारियों के भारी विरोध को देखते हुए मंडी परिषद के निदेशक इंद्रविक्रम सिंह ने प्रतिनिधिमंडल से सीधी वार्ता की। उन्होंने व्यापारियों की सभी समस्याओं और तर्कों को बेहद ध्यान से सुना। इसके बाद उन्होंने नियमों में ढील देने और व्यापारियों के हित में पूरी प्रक्रिया का ‘सरलीकरण’ करने का ठोस आश्वासन दिया है। इस प्रदर्शन में लखनऊ, कानपुर समेत प्रदेशभर के प्रमुख व्यापारिक नेता और सैकड़ों की संख्या में मंडी कारोबारी शामिल हुए।
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यूपी में मंडी परिषद के नए नियम का विरोध:व्यापारियों ने जियो-टैगिंग और गेट पास की समय-सीमा हटाने की मांग की