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लखनऊ में उत्तर प्रदेश पुलिस में उपनिरीक्षक (दरोगा) नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती 2025 की लिखित परीक्षा रविवार को दूसरे दिन भी कड़ी सुरक्षा और निगरानी के बीच शुरू हुई। जिले के 54 परीक्षा केंद्रों पर दो पालियों में हजारों अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी जाएगी। इस बीच पहले दिन प्रश्नपत्र में ‘पंडित’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर शुरू हुआ विवाद दूसरे दिन भी चर्चा में बना रहा, जिसको लेकर पुलिस को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की गई है।
पहले दिन 54 परीक्षा केंद्रों पर हुई परीक्षा, हजारों अभ्यर्थी शामिल
राजधानी लखनऊ में पुलिस भर्ती परीक्षा के लिए कुल 54 स्कूल और कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाया गया था। परीक्षा दो पालियों में आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल हुए।
प्रशासन के अनुसार प्रत्येक पाली में 22,080 अभ्यर्थियों को परीक्षा देनी थी। पहले दिन 44,160 में से 32,212 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी, जबकि दूसरे दिन भी दोनों पालियों में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने परीक्षा में भाग लिया। दो दिनों में करीब 88 हजार अभ्यर्थियों के परीक्षा देने की व्यवस्था की गई है।
डीएम और संयुक्त पुलिस आयुक्त ने किया निरीक्षण
परीक्षा के दिन जिलाधिकारी विशाख जी और संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार ने कई परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
अधिकारियों ने कैसरबाग स्थित नारी शिक्षा निकेतन, क्रिश्चियन पीजी कॉलेज और राजकीय बालिका इंटर कॉलेज शाहमीना रोड समेत कई केंद्रों पर पहुंचकर परीक्षा कक्ष, सुरक्षा व्यवस्था और पर्यवेक्षकों की तैनाती की समीक्षा की। उन्होंने केंद्र व्यवस्थापकों को परीक्षा को पूरी पारदर्शिता और नकलविहीन तरीके से संपन्न कराने के निर्देश दिए।
सीसीटीवी और मोबाइल जैमर से रही निगरानी
परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए थे। सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से स्मार्ट मॉनिटरिंग की जा रही थी।
इसके अलावा नकल रोकने के लिए मोबाइल जैमर भी लगाए गए थे। साथ ही सेक्टर मजिस्ट्रेट और जोनल मजिस्ट्रेट की ड्यूटी लगाई गई थी, जो लगातार परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण करते रहे।
सख्त चेकिंग के बाद मिला प्रवेश
परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की सघन जांच के बाद ही उन्हें अंदर प्रवेश दिया गया। कई केंद्रों पर अभ्यर्थियों के जूते उतरवाए गए और धातु की वस्तुओं को बाहर ही जमा कराया गया।
महिला अभ्यर्थियों को भी जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ा और पायल तथा बिछिया जैसी धातु की चीजें उतारकर ही परीक्षा कक्ष में जाने की अनुमति दी गई।
‘पंडित’ शब्द को लेकर विवाद बरकरार
इस बीच सामान्य हिंदी के प्रश्नपत्र में पूछे गए एक सवाल को लेकर विवाद भी सामने आया है। प्रश्नपत्र में ‘अवसर के अनुसार बदलने वाला’ वाक्यांश के लिए एक शब्द चुनने को कहा गया था, जिसके विकल्पों में सदाचारी, पंडित, अवसरवादी और निष्कपट शब्द दिए गए थे।
‘पंडित’ शब्द को विकल्प के रूप में शामिल किए जाने पर लोगों ने आपत्ति जताई और इसे ब्राह्मण समाज का अपमान बताया। इस मामले को लेकर हजरतगंज कोतवाली में प्रार्थना पत्र देकर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है।
राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी उठा मामला
दरोगा भर्ती परीक्षा के सवाल को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी प्रतिक्रिया सामने आई है। डिप्टी सीएम बृजेश पाठक और भाजपा के दो विधायकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इस पर आपत्ति जताई है।
इसके अलावा कई हिंदू संगठनों ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पेपर वायरल की अफवाह पर दर्ज हुई एफआईआर
परीक्षा के दौरान सोशल मीडिया पर पहली पाली का प्रश्नपत्र वायरल होने की भी चर्चा सामने आई थी। हालांकि भर्ती बोर्ड ने वायरल पेपर को फर्जी बताया है।
इस मामले को लेकर लखनऊ के हुसैनगंज थाने में 13 और 14 मार्च को कुल सात एफआईआर दर्ज की गई हैं। पुलिस इन मामलों की जांच कर रही है।
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