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आगरा की रहने वाली वृद्धा शाीला देवी को 9 दिन पहले डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया था। मगर,अंतिम संस्कार से पहले उनकी सांसें लौट आई थीं। इसके बाद 9 दिन तक मौत से जंग लड़ने के बाद रविवार को शीला देवी ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। मां के बचने की उम्मीद लगाए बैठे परिवार में एक बार फिर मातम छा गया। आगरा के ट्रांस यमुना क्षेत्र के श्री नगर कॉलोनी निवासी शीला देवी को को सांस संबंधित बीमारी थी। उनके पति हरिओम माहौर की मौत हो चुकी है। वह अपने बेटे सुनील माहौर के परिवार के साथ रहती हैं। उनका दूसरा बेटा संजीव बदायूं में एक निजी अस्पताल में कार्यरत है। शीला देवी की तबितय काफी दिन से खराब थी। उनके लीवर में दिक्कत थी। डेढ़ महीने पहले शीला देवी इलाज के लिए अपने बेटे के पास बदायूं गईं थीं। बेटे ने उन्हें बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। मंगलवार को उन्हें वेंटीलेटर पर रख दिया गया। बुधवार, 30 जलाई को तड़के करीब तीन बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। बेटा एंबुलेंस से शव लेकर शाम करीब 7 बजे घर पहुंचा। शव को घर के एक कमरे में जमीन पर रख दिया गया। शव को देखकर घरवाले रो रहे थे। घर में अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी। फूल-माला आ गए। 17 घंटे बाद रात करीब 8 बजे 65 वर्षीय महिला के शरीर में हलचल हुई।
जब शीला देवी के दामाद ने उन्हें छुआ तो उन्होंने हाथ पकड़ लिया। इसके बाद परिजनों में अफरा-तफरी मच गई। बिना देर किए उन्हें तत्काल आगरा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार शुरू हुआ। परिजनों में खुशी थी। उन्हें आस थी कि शीला देवी फिर से ठीक हो जाएंगी। लेकिन रविवार को शीला की सांसें थम गईं। परिवार की आंखें फिर एकबार नम हो गईं। आगरा से बदायूं ले गया था बेटा
आगरा के निजी अस्पताल में शीला देवी का इलाज चल रहा था। उनकी सेहत में कुछ सुधार हुआ था। वो आंख खोल रही थीं। हाथ भी हिला रही थीं। इसके बाद बेटा उन्हें इलाज के लिए बदायूं ले गया। वहां पर रविवार को उपचार के दौरान उनकी सांसें थम गई।
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