![]()
मैनपुरी में प्रशासन ने नशे के खिलाफ एक व्यापक रणनीति तैयार की है। डीएम डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने अधिकारियों के साथ बैठक कर नशा मुक्ति अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावित लोगों का सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास भी आवश्यक है। डीएम ने गांवों में अवैध शराब बनाने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के निर्देश दिए। इन परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाकर उनके जीवन स्तर में सुधार किया जाएगा, ताकि वे अवैध गतिविधियों से दूर रह सकें। युवाओं तक नशे की पहुंच रोकने के लिए स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। इंजीनियरिंग कॉलेजों, अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों और आवासीय व बोर्डिंग संस्थानों पर विशेष निगरानी रखने को भी कहा गया है। मेडिकल स्टोर्स पर भी सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी ने ड्रग इंस्पेक्टर को बिना चिकित्सकीय पर्चे के दवाओं की बिक्री, प्रतिबंधित इंजेक्शन और अन्य मादक पदार्थों की अवैध आपूर्ति पर निगरानी बढ़ाने को कहा। ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि अयांश मेडिकल स्टोर पर बड़ी मात्रा में नारकोटिक्स और एंटीबायोटिक दवाएं मिली थीं, जिनके खरीद-बिक्री के बिल दुकानदार नहीं दिखा सका। दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं और दुकानदार को नोटिस जारी किया गया है। आबकारी विभाग के अनुसार, चालू माह में नशा उन्मूलन अभियान के तहत अब तक 49 मामले दर्ज किए गए हैं। इसमें लगभग 1500 लीटर अवैध कच्ची शराब और लहन बरामद कर नष्ट की गई। पुलिस ने भी कार्रवाई करते हुए 710 ग्राम गांजा बरामद किया और दो लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जिला कारागार में नशे की आपूर्ति रोकने के लिए बंदियों से मिलने वालों की सघन तलाशी के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जेल के भीतर प्रतिबंधित नशे की सामग्री किसी भी स्थिति में नहीं पहुंचनी चाहिए। बैठक में सीएमओ डॉ. आरसी गुप्ता, एएसपी ग्रामीण अभिषेक तिवारी समेत आबकारी, समाज कल्याण, ग्रामोद्योग, स्वास्थ्य और जेल विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
Source link
मैनपुरी में नशे के खिलाफ प्रशासन की नई रणनीति:मेडिकल स्टोर से जेल तक शिकंजा, पुनर्वास पर भी जोर