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मिर्जापुर के लालडिग्गी स्थित लायंस स्कूल सभागार में रविवार को संस्कार भारती, लायंस क्लब और उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में कजली महोत्सव का आयोजन किया गया। इस महोत्सव में लोक कलाकारों ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया, जिसमें विशेष रूप से लुप्त होती ढुनमुनियां कजरी की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पद्मश्री उर्मिला श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में महिलाओं के एक समूह ने पारंपरिक वेशभूषा में ढुनमुनियां कजरी प्रस्तुत की। यह एक ऐसी पारंपरिक शैली है जिसे समूह में गीत और नृत्य के साथ प्रस्तुत किया जाता है। आयोजकों ने बताया कि यह विधा धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है, और विंध्य क्षेत्र को कजली का उद्गम स्थल माना जाता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य मंत्री सोहन लाल श्रीमाली ने लोक परंपराओं को हमारी सांस्कृतिक पहचान बताया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी लोक विधाओं से जोड़ना और उन्हें संरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। श्रीमाली ने कलाकारों के प्रयासों की सराहना करते हुए ऐसे आयोजनों को संस्कृति के संवर्धन में महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम संयोजक और संस्कार भारती काशी प्रांत अध्यक्ष डॉ. गणेश प्रसाद अवस्थी ने मिर्जापुर में जन्मी कजली की पहचान को देश-विदेश तक पहुंचने की बात कही। उन्होंने लोक विधाओं को जीवित रखने में कलाकारों और संस्कृति प्रेमियों के योगदान को सराहनीय बताया।
संरक्षक विश्वनाथ अग्रवाल ने लोक परंपराओं को सहेजने में लगे कलाकारों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर लायंस क्लब अध्यक्ष मनोज कुमार मैनी, सचिव प्रशांत अग्रवाल, सोमेश्वर मिश्रा, शिवराम शर्मा, विजय कुमार दुबे, डॉ. अरविंद अवस्थी, डॉ. संदीप श्रीवास्तव और सोमेश्वर पति त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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मिर्जापुर कजली महोत्सव में लुप्त होती ढुनमुनियां कजरी प्रस्तुत:पद्मश्री उर्मिला श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में महिलाओं ने किया प्रदर्शन