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गोरखपुर के कौड़ीराम स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में मिड-डे मील का गेहूं पिसवाने गए छात्र के आंख में गंभीर चोट आई है। वह क्लास 8 में पढता है। परिजनों का आरोप है कि स्कूल में बच्चों से जबरन काम करवाया जाता है। उनका कहना है कि बच्चे के मना करने के बावजूद उसे साइकिल से भेजा गया। बोरी बांधते वक्त रबर से आंख में चोट लग गई। जिसके बाद परिजन तुरंत हॉस्पिटल लेकर भागे। डॉक्टरों ने बताया कि आंख की रोशनी चली गई है। वहीं प्रिंसिपल का कहना है कि छात्र अपने मन से गया था। उन्होंने आर्थित सहायता देने की बात भी कही है। यह मामला 29 जून दोपहर करीब 12 बजे का बताया जा रहा है। जानिए पूरा मामला… जानकारी के अनुसार, जगदीशपुर ओझौली का रहने वाला कक्षा आठ का छात्र सलीम विद्यालय में मिड-डे मील के लिए गेहूं पिसवाने गया था। परिजनों का आरोप है कि विद्यालय की इंचार्ज प्रधानाचार्य अजंता राय ने उसे गेहूं पिसवाने के लिए भेजा था। पिसाई के बाद जब छात्र बोरी को साइकिल पर बंजी (रबर) से बांध रहा था, तभी रबर छिटककर उसकी आंख में लग गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजनों का दावा है कि हादसे में उसकी एक आंख की रोशनी चली गई है। काम न करने पर नाम कटवाने की धमकी देते- आरोप
घायल छात्र के पिता मजनू और माता जयशाह का आरोप है कि विद्यालय में छात्रों से नियमित रूप से गेहूं पिसवाने सहित अन्य कार्य कराए जाते हैं। उनका कहना है कि यदि कोई छात्र ऐसे कार्य करने से इंकार करता है तो उसका नाम विद्यालय से काटने की धमकी दी जाती है। प्रिंसिपल ने 55 हजार रुपए की मदद की
उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। घटना के बाद इंचार्ज प्रधानाचार्य की ओर से छात्र के इलाज के लिए 55 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की भी जानकारी सामने आई है। SDI का दावा, स्पष्टीकरण मांगा गया
सूत्रों के अनुसार, मामले की जानकारी मिलने पर एसडीआई जयप्रकाश मौर्य ने इंचार्ज प्रधानाचार्य से फोन पर स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन आरोप है कि उन्होंने फोन पर जवाब देने से इंकार कर दिया। वहीं प्रिंसिपल का कहना है कि मुझे न तो कोई नोटिस मिला है, ना ही किसी ने स्पष्टीकरण मांगा है। बता दें कि एसडीआई का ऑफिस स्कूल के ठीक बगल में ही है। प्रिंसिपल बोलीं- बस साइकिल मांगा गया था
इंचार्ज प्रधानाचार्य अजंता राय ने परिजनों के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि छात्र से केवल साइकिल मांगी गई थी ताकि गेहूं ले जाया जा सके। उनके अनुसार, छात्र स्वयं अपनी इच्छा से साइकिल देने के साथ-साथ गेहूं पिसवाने के लिए साथ गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यालय में किसी भी छात्र से जबरन कोई कार्य नहीं कराया जाता और लगाए गए अन्य सभी आरोप तथ्यहीन हैं। फिलहाल मामले को लेकर शिक्षा विभाग की ओर से जांच कराए जाने की संभावना है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और परिजनों और विद्यालय प्रशासन के दावों में कितनी सत्यता है।
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मिड-डे मील का गेहूं पिसवाने गए छात्र का आंख फूटा:गोरखपुर में परिजन बोले- जबरन काम करवाया जाता, नाम कटवाने की धमकी देते