हरतालिका तीज के पर्व पर जहां सुहागिन महिलाएं अपने हाथों पर पति का नाम लिखकर मेहंदी रचा रही हैं। वहीं प्रयागराज के धरना स्थल पर आंदोलन कर रहीं TGT-PGT महिला अभ्यर्थियों ने अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। महिला अभ्यर्थियों ने हाथों पर मेहंदी से ‘प
.
भर्ती की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का धरना सोमवार को 15वें दिन भी जारी है। जबकि चार अभ्यर्थी पिछले 10 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं। महिला अभ्यर्थियों ने कहा कि आज तीज का व्रत है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए उपवास रखती हैं, लेकिन विडंबना है कि देश की बेटियां अपने अधिकारों के लिए सड़क पर बैठने को मजबूर हैं।
3 तस्वीरें देखिए…

महिला अभ्यर्थियों ने हाथों पर मेहंदी से ‘पुरानी नियमावली बहाल करो’ और ‘पुराने पैटर्न से परीक्षा हो’ जैसे नारे लिखे।

हाथों पर केवल मेहंदी नहीं, बल्कि भर्ती नियमों को लेकर संघर्ष और भविष्य की चिंता भी रची गई है।

तीज का त्यौहार धरना स्थल पर ही मनाया जा रहा है।
व्रत में पति की लंबी उम्र के लिए संकल्प लिया जाता है, जबकि वे धरना स्थल पर पुरानी नियमावली के आधार पर भर्ती और पुराने परीक्षा पैटर्न से परीक्षा कराने का संकल्प ले रही हैं। उन्होंने कहा कि इस बार हाथों पर केवल मेहंदी नहीं, बल्कि भर्ती नियमों को लेकर संघर्ष और भविष्य की चिंता भी रची गई है।
बेटियों की सुनवाई नहीं
बीना राय अपनी मांगों को लेकर कहा कि तीज के व्रत वाले दिन, जब महिलाओं को घर पर पूजा करनी चाहिए, वे धरना स्थल पर आमरण अनशन कर रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” और “सबका साथ, सबका विकास” नारों पर सवाल उठाते हुए कहा कि धरने पर बैठी इन बेटियों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

बीना राय अपनी मांगों को लेकर कहा कि तीज के व्रत वाले दिन, जब महिलाओं को घर पर पूजा करनी चाहिए।
सुनीता का कहना है कि ये तो दुर्भाग्य ही है। अगर हम लोगों को ऐसा दिन नहीं देखना पड़ता, तो हम लोग आज त्यौहार सही से मनाते। हमारी यही मांग है कि एक मौका हम लोगों को दिया जाए।

सुनीता का कहना है कि ये तो दुर्भाग्य ही है। अगर हम लोगों को ऐसा दिन नहीं देखना पड़ता।
महिला अभ्यर्थी नीतू ने कहा तीज जैसे महत्वपूर्ण त्योहार के अवसर पर भी घर जाने के बजाय धरना स्थल पर प्रदर्शन कर रहे हैं। अपना विरोध दर्ज करने के लिए महिलाओं ने हाथों में मेहंदी से “पुरानी नियमावली” लिखा हुआ है। सरकार को इस बात पर विचार करना चाहिए कि महिलाएं अपना त्योहार सड़क पर मनाने को मजबूर हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनके धरना स्थल के पास ही मौजूद हैं। उनसे आग्रह है कि वे आकर आमरण अनशन पर बैठे उसाथियों और अन्य लोगों से बात करें।

नीतू ने कहा तीज जैसे महत्वपूर्ण त्योहार के अवसर पर भी घर जाने के बजाय धरना स्थल पर प्रदर्शन कर रहे हैं।
कंचन सिंह कहती हैं कि मुख्यमंत्री धरना स्थल से मात्र 100 मीटर दूर हैं, फिर भी वे आमरण अनशन पर बैठे छात्रों का दुख-दर्द देखने नहीं आ रहे हैं। छात्र ‘पुरानी नियमावली’ बहाल करने की मांग पर अड़े हुए हैं। उन्हें अपने बच्चों की पीड़ा क्यों नहीं दिख रही है।

कंचन सिंह कहती हैं कि मुख्यमंत्री धरना स्थल से मात्र 100 मीटर दूर हैं, फिर भी वे आमरण अनशन पर बैठे छात्रों का दुख-दर्द देखने नहीं आ रहे हैं।
दसवें दिन भी आमरण अनशन
अभ्यर्थी TGT-PGT भर्ती का विज्ञापन पुरानी नियमावली और पुराने परीक्षा पैटर्न के आधार पर जारी करने की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों के अनुसार, अनिश्चितकालीन धरना 31 अगस्त से चल रहा है और पांच सितंबर से आमरण अनशन शुरू किया गया था।
