ग्रीन कॉरिडोर में ऑटो-ई-रिक्शा पर रोक व्यवस्था धड़ाम:व्यवस्था पहले ही दिन बेअसर, सारसौल से बौनेर के बीच सुबह छह से 10 बजे तक सड़कों पर दौड़ते दिखे वाहन


शहर को जाम से राहत देने के लिए बनाए गए ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था सोमवार को एक बार फिर सवालों के घेरे में रही। सरसौल चौराहे से बोनेर तिराहे तक सुबह छह से 10 बजे तक ई-रिक्शा और ऑटो के प्रवेश पर रोक के बावजूद प्रतिबंधित समय में बड़ी संख्या में वाहन कॉरिडोर पर दौड़ते नजर आए। यातायात पुलिस की मौजूदगी के बीच भी कई स्थानों पर ई-रिक्शा और ऑटो बेरोकटोक चलते रहे। इससे साफ है कि व्यवस्था कागजों पर सख्त, लेकिन सड़क पर कमजोर नजर आ रही है।
ग्रीन कॉरिडोर के तहत सरसौल, रसूलगंज, कंपनीबाग, दुबे का पड़ाव, एटा चुंगी और बोनेर तिराहे समेत प्रमुख चौराहों पर यातायात पुलिस की तैनाती की गई है। तय समय में ई-रिक्शा और ऑटो को कॉरिडोर में प्रवेश से रोकने की व्यवस्था है। इसके पीछे उद्देश्य यह है कि व्यस्त समय में मुख्य मार्ग पर यातायात निर्बाध रहे और लोगों को बार-बार लगने वाले जाम से राहत मिल सके।
आज भी धड़ाम दिखी व्यवस्था
सोमवार सुबह प्रतिबंधित समय में कई जगह ई-रिक्शा और ऑटो कॉरिडोर पर दिखाई दिए। इससे यातायात व्यवस्था को लेकर किए जा रहे दावों पर सवाल खड़े हो गए। पुलिस की ओर से नियमों का पालन कराने के लिए निगरानी की बात कही गई है, लेकिन मौके की स्थिति में प्रतिबंध का असर बहुत कम नजर आया। यदि इसी तरह नियम टूटते रहे तो ग्रीन कॉरिडोर बनाने का मूल उद्देश्य ही प्रभावित होगा।
आंदोलन के बाद कार्रवाई में नरमी का असर
ऑटो और टेंपो चालकों के पिछले आंदोलन के बाद भी यातायात पुलिस के सामने कार्रवाई को लेकर चुनौती बनी हुई है। चालक संगठनों के विरोध के चलते पुलिस प्रशासन पर कार्रवाई को लेकर दबाव रहने की बात सामने आती रही है। ऐसे में प्रतिबंधित समय में नियम तोड़ने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई भी अपेक्षाकृत नरम दिखाई दे रही है। यही वजह है कि रोक के बावजूद चालक बेखौफ होकर कॉरिडोर में प्रवेश करते नजर आ रहे हैं।
व्यवस्था का उद्देश्य जाम से राहत
यातायात पुलिस का कहना है कि ग्रीन कॉरिडोर का मकसद किसी एक वर्ग को परेशान करना नहीं, बल्कि शहरवासियों को सुगम यातायात उपलब्ध कराना है। सावन में कांवड़ यात्रा के दौरान भी रूट डायवर्जन से यातायात व्यवस्था संभाली गई थी। इसी तर्ज पर अब ग्रीन कॉरिडोर के लिए निर्धारित समय में वाहनों का संचालन नियंत्रित किया जा रहा है।
कार्रवाई नहीं हुई तो नियम बन जाएगा मजाक
ग्रीन कॉरिडोर की सफलता के लिए केवल रूट तय करना और पुलिसकर्मियों की तैनाती पर्याप्त नहीं है। प्रतिबंधित समय में ऑटो और ई-रिक्शा प्रवेश करते हैं तो उनके खिलाफ लगातार कार्रवाई जरूरी है। नरमी बरती गई तो कुछ दिनों में प्रतिबंध महज औपचारिकता बनकर रह जाएगा और जाम से राहत की पूरी कवायद बेअसर हो सकती है।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *