मंत्री सुरेश खन्ना पर एफआईआर कराने की याचिका खारिज:आरोप : मंत्री ने अपर मुख्य सचिव को पत्र लिख जांच में हस्तक्षेप किया


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकलपीठ ने यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता सनातन धर्म रक्षापीठ ने मथुरा की अदालत में बी एन एस एस की धारा 175(3) के तहत आवेदन दिया था कि मंत्री सुरेश खन्ना के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच कराई जाए। जानिए क्या है मामला
याचिकाकर्ता का आरोप है कि मंत्री ने 16 जुलाई 2024 को अपर मुख्य सचिव (गृह) को एक पत्र लिखकर मेरठ में चल रही एक जांच में हस्तक्षेप किया, जो वृंदावन, मथुरा स्थित संपत्ति से जुड़े 7 अप्रैल 2022 के एक पुराने मामले से संबंधित थी। मथुरा की अदालत ने 6 जून 2025 को यह आवेदन क्षेत्राधिकार के अभाव में खारिज कर दिया था, जिसे चुनौती देते हुए यह रिविजन याचिका दाखिल की गई थी। विवादित पत्र लखनऊ में लिखा गया
कोर्ट ने पाया कि विवादित पत्र लखनऊ में लिखा गया और लखनऊ स्थित गृह विभाग को भेजा गया था। यह पत्र केवल मंत्री की पत्नी की शिकायत को आगे बढ़ाने और नियमानुसार कार्रवाई करने का अनुरोध भर था, जिसमें कोई सीधा या दबावपूर्ण निर्देश नहीं था। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पूर्व मामले में चार्जशीट 4 अक्टूबर 2024 को दाखिल हो चुकी थी और मेरठ कोर्ट ने 7 अक्टूबर 2024 को संज्ञान भी ले लिया था । यानी आगे जांच के आदेश वाला पत्र (24 अक्टूबर 2024) इसके बाद आया, इसलिए हस्तक्षेप या देरी का आरोप नहीं टिकता। कोर्ट तस्वीर साफ करते हुए याचिका खारिज की
कोर्ट ने बी एन एस एस की धारा 199 की व्याख्या करते हुए कहा कि किसी अपराध का “परिणाम” तभी क्षेत्राधिकार तय करता है जब वह अपराध की परिभाषा का अनिवार्य हिस्सा हो। महज दूर की या परोक्ष कड़ी काफी नहीं।
चूंकि मंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम या बी एन एस की संबंधित धाराओं के तहत कोई अपराध ही नहीं बनता पाया गया, इसलिए मथुरा अदालत को क्षेत्राधिकार नहीं था। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए याचिका को निराधार बताकर खारिज कर दिया।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *