भ्रष्टाचार उजागर के मामले में पत्रकार की गिरफ्तारी पर रोक:हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता व राज्य सरकार से जवाब तलब


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुजफ्फरनगर जिले के एक पत्रकार अर्जुन पवार की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने राज्य सरकार से याचिका पर जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति लक्ष्मी कांत शुक्ल की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है। याची ने अपनी पेशेवर जिम्मेदारी निभाते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले कई लेख प्रकाशित किए थे। इन लेखों से प्रभावित होकर प्रतिवादी शिकायतकर्ता ने 2 मई 2026 को थाना बुढ़ाना, जिला मुजफ्फरनगर में धारा 308(6) बी एन एस के तहत एफआईआर दर्ज कराया। याची अधिवक्ता ने तर्क दिया कि दर्ज एफआईआर पूरी तरह दुर्भावनापूर्ण है और इसका मकसद सरकारी संस्थाओं की रचनात्मक आलोचना को दबाना है। अधिवक्ता ने सर्वोच्च न्यायालय के सालिब @ शालू @ सलीम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट को याद दिलाया कि जब किसी एफआईआर के पीछे व्यक्तिगत दुर्भावना या बदले की भावना हो, तो अदालत का यह कर्तव्य है कि वह केवल एफआईआर की इबारत तक सीमित न रहे, बल्कि समस्त परिस्थितियों की गहराई से जांच करे। कोर्ट ने कहा शिकायतकर्ता प्रतिवादी और सरकारी अधिवक्ता चार सप्ताह के भीतर प्रति-शपथपत्र दाखिल करे। अगली सुनवाई की तारीख तक अथवा पुलिस रिपोर्ट दाखिल होने तक जो भी पहले हो याची को गिरफ्तार न किया जाय। यह मामला पत्रकारिता की स्वतंत्रता और सरकारी तंत्र की जवाबदेही के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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