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भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में हो रही देरी को लेकर चिंता व्यक्त की है। संगठन ने समयबद्ध तरीके से चुनाव कराने के संवैधानिक दायित्व का पालन सुनिश्चित करने के संबंध में एक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में बताया गया है कि उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 243E (पंचायतों का कार्यकाल) और 243K (राज्य निर्वाचन आयोग की शक्तियां) के अनुसार, निर्धारित समय-सीमा के भीतर पंचायत चुनाव कराना एक अनिवार्य संवैधानिक दायित्व है। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1947 के प्रावधान भी समय पर चुनाव सुनिश्चित करते हैं। वर्तमान परिस्थितियों में पंचायत चुनावों को लेकर कई चिंताजनक स्थितियां सामने आई हैं। अभी तक चुनाव की तिथि और कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है, जिससे अनिश्चितता बनी हुई है। राज्य निर्वाचन आयोग की स्थिति और सक्रियता को लेकर भी स्पष्टता का अभाव है। इसके अलावा, इस विषय पर माननीय उच्च न्यायालय में सुनवाई लगातार स्थगित हो रही है, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो गई है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण और प्रकाशन की तिथि में बार-बार परिवर्तन किया जा रहा है। साथ ही, पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से संबंधित आयोग के गठन में भी विलंब हो रहा है, जो चुनाव प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से प्रभावित कर रहा है। संगठन ने सवाल उठाया है कि जहां विधानसभा और लोकसभा चुनावों का आयोजन समयबद्ध रूप से किया जाता है और निर्वाचन संबंधी प्रक्रियाएं भी निर्धारित समय के भीतर पूरी कर ली जाती हैं, वहीं त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में बार-बार हो रहा विलंब लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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भारतीय किसान यूनियन ने पंचायत चुनाव में देरी पर सौंपा:उत्तर प्रदेश में समय पर चुनाव कराने की मांग