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श्रीश्याम परिवार सेवा ट्रस्ट की ओर से फतेहाबाद रोड स्थित राजदेवम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार को कथावाचक पूज्य जया किशोरी ने कहा कि भगवान की लीलाओं को सांसारिक नजरिए से नहीं, बल्कि भगवत दृष्टि से देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज मनुष्य दुख के समय भगवान को याद करता है, लेकिन सुख मिलने पर उन्हीं का मजाक बनाने लगता है। जब तक हम स्वयं अपने भगवान का सम्मान नहीं करेंगे, तब तक दूसरे भी उनका सम्मान नहीं करेंगे। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि समाज में कई बदलाव बिना हिंसा के भी लाए जा सकते हैं। यदि भगवान का मजाक उड़ाया जाए तो उस पर हंसने के बजाय उसका विरोध करना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से संकल्प भी दिलाया कि वे भगवान के प्रति सम्मान बनाए रखेंगे और किसी भी प्रकार की धार्मिक आस्था का उपहास नहीं होने देंगे। कथा में जया किशोरी ने कंस वध, गोपी-उद्धव संवाद और सुदामा चरित्र का विस्तार से वर्णन किया। गोपी-उद्धव प्रसंग के माध्यम से उन्होंने कहा कि ज्ञान से बड़ा प्रेम होता है। ब्रजवासियों का भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम ही उनकी सबसे बड़ी भक्ति था। इस प्रसंग के दौरान भजनों के बीच कई श्रद्धालु भावुक हो गए। सुदामा चरित्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में ईमानदारी सबसे बड़ा धन है। मेहनत से कमाई करें और कभी किसी का हक न मारें। सामाजिक जीवन पर बोलते हुए जया किशोरी ने कहा कि मजाक वही है जिसमें बोलने वाला और सुनने वाला दोनों हंसें। यदि किसी की भावनाएं आहत हों तो वह मजाक नहीं है। उन्होंने कहा कि आजकल “सॉरी” शब्द का गलत इस्तेमाल बढ़ गया है, जिससे लोग गलती करने को हल्के में लेने लगे हैं। विवाह पर उन्होंने कहा कि बच्चों की शादी तभी करनी चाहिए, जब वे मानसिक रूप से परिपक्व और जिम्मेदार बन जाएं। जल्दबाजी में लिए गए फैसले बाद में रिश्तों पर भारी पड़ते हैं। कथा के दौरान ‘जय-जय राधारमण हरि बोल’, ‘चलो रे मन श्री वृंदावन धाम’ सहित कई भजनों पर श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे। आरती के बाद सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। इस दौरान ट्रस्ट के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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भगवान की लीलाओं को सही नजरिए से देखें:कथा में जया किशोरी बोलीं- भगवान पर हंसना बंद करें, बदलाव खुद आएगा