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लखनऊ में बिरजू महाराज कथक संस्थान की ओर से ‘कथक संध्या’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सुर, ताल और घुंघरुओं की झंकार ने दर्शकों को आनंदित कर दिया। नवाबों के शहर में राजस्थानी (जयपुर) घराने की पदचाप और शास्त्रीय कला का संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम, संस्थान की अध्यक्ष डॉ. कुमकुम धर और उपाध्यक्ष डॉ. मिथिलेश तिवारी ने दीप प्रज्वलन कर किया। इसके बाद संस्थान के युवा कलाकारों ने राग मियां मल्हार की प्रसिद्ध बंदिश ‘बिजुरी चमके बरसे मेहरवा’ पर कथक प्रस्तुत किया। स्वयं मिश्रा ने बांसुरी पर संगत दी इस प्रस्तुति में मीना वर्मा ने हारमोनियम, कृष्ण कुमार मौर्य ने सिंथेसाइजर, नीतीश भारती और आनंद दीक्षित ने तबला तथा स्वयं मिश्रा ने बांसुरी पर संगत दी। शाम का मुख्य आकर्षण जयपुर घराने के प्रसिद्ध नर्तक चेतन कुमार जवड़ा रहे। उन्होंने शिव स्तुति ‘हे अमरनाथ, हे विश्वनाथ’ से अपनी प्रस्तुति आरंभ की। इसके बाद उन्होंने 9 मात्राओं के ताल बसंत और राग बसंत में जयपुर घराने की बारीक लयकारी और भावभंगिमाएं पेश कीं। मेधावी छात्रों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया चेतन कुमार ने सुंदरलाल गंगानी की वर्षा ऋतु पर आधारित रचना और अंत में द्रुत तीनताल में जटिल पद-संचालन (फुटवर्क) और चक्करदार गतियों का प्रदर्शन किया। इस प्रस्तुति में रमेश मेवाल ने गायन-हारमोनियम, भावदीप जवड़ा ने पखावज-पढ़ंत और मोहित चौहान ने तबले पर उनका साथ दिया।कार्यक्रम के अंत में हॉबी कोर्स पूरा करने वाले मेधावी छात्रों को अतिथियों द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम का संचालन तरूश्री ने किया।
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बिरजू महाराज कथक संस्थान ने 'कथक संध्या' का आयोजन किया:लखनऊ में सुर, ताल और घुंघरुओं की झंकार ने मोहा मन