शोहरतगढ़ में बिजली संकट पर गरमाई सियासत:सपा नेता मणेन्द्र मिश्रा बोले- लोग अंधेरे में रहने को मजबूर; फर्जी बिल थमाने वाले विभाग पर आंदोलन की चेतावनी


सिद्धार्थनगर जिले के शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में गहराते बिजली संकट, भीषण कटौती और गलत रोस्टर व्यवस्था को लेकर प्रदेश सरकार व स्थानीय प्रशासन के खिलाफ विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। समाजवादी शिक्षक सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मणेन्द्र मिश्रा ने शुक्रवार को भाजपा सरकार और बिजली विभाग की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि शोहरतगढ़ क्षेत्र में बिजली व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है, जिससे ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ कस्बाई क्षेत्रों में भी हाहाकार मचा हुआ है। अंधेरे में रहने को मजबूर ग्रामीण, सर्पदंश और विषैले कीड़ों का डर सपा नेता मणेन्द्र मिश्रा ने कहा कि शोहरतगढ़ और बढ़नी जैसी प्रमुख नगर पंचायतों के साथ-साथ पूरे विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में बिजली की बेहद बदहाल व्यवस्था है। भीषण गर्मी और उमस के बीच घंटों अघोषित बिजली कटौती की जा रही है, जिससे किसान, मजदूर, छात्र और व्यापारी बुरी तरह परेशान हैं। बारिश के मौसम में बिजली गायब रहने से गांवों में अंधेरा छाया रहता है। रात के समय विषैले कीड़ों और सर्पदंश (सांप के काटने) की घटनाओं का डर बना रहता है, जिससे लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं। वर्षों तक नहीं भेजते बिल, फिर थमाते हैं लाखों का फर्जी बकाया बिजली विभाग के अधिकारियों की भ्रष्ट कार्यशैली को उजागर करते हुए मणेन्द्र मिश्रा ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विभाग जानबूझकर महीनों और सालों तक गरीब उपभोक्ताओं को बिजली बिल जारी नहीं करता। इसके बाद अचानक गरीब किसानों, मजदूरों और छोटे दुकानदारों को लाखों रुपये के मनगढ़ंत व फर्जी बकाये का बिल थमा दिया जाता है। इस वसूली तंत्र के जरिए गरीब जनता का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। सुधार न होने पर सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगी सपा मणेन्द्र मिश्रा ने शासन और स्थानीय प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति, रोस्टर प्रणाली और व्यवस्था में तुरंत सुधार नहीं किया गया तथा फर्जी बिलों के नाम पर जनता का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, तो समाजवादी पार्टी शांत नहीं बैठेगी। जनता के अधिकारों और सम्मान के लिए सपा कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन और प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।

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