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बरेली में भगवान परशुराम जन्मोत्सव के पावन अवसर पर आज, 20 अप्रैल को परशुराम युवा मंच द्वारा विशाल शोभायात्रा का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर 2 बजे अलखनाथ बाबा मंदिर के पास स्थित तुलसी स्थल पर देवाधिदेव महादेव के रुद्राभिषेक के साथ हुई। इसके बाद शाम 7 बजे से भक्ति और उत्साह के साथ शोभायात्रा का शुभारंभ किया गया। इस वर्ष यह आयोजन अपने 24वें वर्ष में प्रवेश कर गया है, जिसे लेकर समाज के हर वर्ग में भारी उत्साह देखने को मिला। अयोध्या से आए महंत और संतों का मिला आशीर्वाद इस भव्य आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में अयोध्या हनुमानगढ़ी के श्री महंत बलराम दास महाराज ने शिरकत की। उनके साथ ही महामंडलेश्वर शिवानंद महाराज और महामंडलेश्वर आचार्य संजीव गौड़ भी मौजूद रहे, जिन्होंने श्रद्धालुओं को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। परशुराम युवा मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन मिश्रा ने बताया कि इस यात्रा का मूल उद्देश्य भगवान परशुराम के न्यायप्रिय और सत्यनिष्ठ आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना और समाज में नई चेतना जागृत करना है। एटा की झांकियां और महाकाल बैंड रहे आकर्षण का केंद्र शोभायात्रा में इस बार एटा से आईं विशेष झांकियां आकर्षण का मुख्य केंद्र रहीं। इनमें भगवान गणेश, शिव-पार्वती, लक्ष्मी-नारायण, श्रीराम दरबार, काली अखाड़ा और भगवान परशुराम के साथ-साथ जगन्नाथ जी की मनमोहक झांकियों ने लोगों का मन मोह लिया। यात्रा की रौनक बढ़ाने के लिए मथुरा के प्रसिद्ध बैंड और चंदौसी के महाकाल बैंड ने अपनी सुमधुर प्रस्तुति दी। यह यात्रा तुलसी स्थल से शुरू होकर किला, साहूकारा, बड़ा बाजार, घंटाघर और कोतवाली होते हुए सिविल लाइंस स्थित हनुमान मंदिर पर आरती के साथ संपन्न हुई। अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की मिसाल है भगवान परशुराम का जीवन पवन मिश्रा ने भगवान परशुराम से जुड़े मिथकों को स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने कभी किसी जाति विशेष के विरुद्ध शस्त्र नहीं उठाए, बल्कि केवल दुष्ट और अत्याचारी शासकों का संहार किया था। उन्होंने तर्क दिया कि जिस प्रकार श्री कृष्ण ने कंस का वध किया, ठीक उसी प्रकार परशुराम जी ने धर्म की स्थापना हेतु शस्त्र धारण किए थे। यह यात्रा सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल बनी, जहाँ हिंदू संगठनों के साथ-साथ मुस्लिम समाज ने भी जगह-जगह पुष्प वर्षा कर यात्रा का जोरदार स्वागत किया।
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बरेली में निकली भगवान परशुराम की 24वीं भव्य शोभायात्रा:अयोध्या के महंत बलराम दास ने दी उपस्थिति, एटा की झांकियां और मथुरा-चंदौसी के बैंड ने मोहा मन