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देवरिया जिले के गौरीबाजार स्थित बंद पड़ी कानपुर शुगर वर्क्स फैक्ट्री के मजदूरों और किसानों ने सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। उन्होंने बकाया भुगतान की मांग को लेकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा, जिसमें मामले की जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई। यह प्रदर्शन समाजवादी मजदूर सभा के नेतृत्व में हुआ। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कानपुर शुगर वर्क्स, जो भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के अधीन संचालित थी, वर्ष 1995-96 में बंद हो गई थी। इसके बाद बिना किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए फैक्ट्री का ताला तोड़कर मशीनरी और प्लांट हटा दिए गए। मजदूरों के आवास भी ध्वस्त कर दिए गए थे। मजदूरों और किसानों का नहीं हुआ भुगतान संगठन के जिलाध्यक्ष ऋषिकेश यादव ने धरने का नेतृत्व करते हुए बताया कि मजदूरों का न तो ले-ऑफ हुआ और न ही उन्हें अब तक बकाया भुगतान मिला है। ज्ञापन में इलाहाबाद हाईकोर्ट की रिट याचिका संख्या 82821/2019 का हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद मजदूरों और किसानों का भुगतान नहीं कराया गया है। समाजवादी मजदूर सभा ने आरोप लगाया कि उपश्रमायुक्त द्वारा मजदूरों के पक्ष में जारी वसूली प्रमाण पत्र को उद्योगपतियों के दबाव में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा वापस ले लिया गया। संगठन ने मजदूरों के लगभग 14 करोड़ 73 लाख रुपये और किसानों के करीब 1 करोड़ 62 लाख रुपये के बकाया भुगतान को तत्काल दिलाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 1998 में उत्तर प्रदेश शासन के नाम दर्ज भूमि को वर्ष 2011 में नियमों के विरुद्ध बेच दिया गया। संगठन ने बताया कि न्यायालय ने इस भूमि बिक्री प्रक्रिया को दोषपूर्ण माना था। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से बंद पड़ी मिल की जमीन पर नया उद्योग स्थापित करने की मांग की। उनका कहना था कि इससे क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिलेगा और वर्षों से प्रभावित मजदूर परिवारों को राहत मिल सकेगी।
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बंद चीनी मिल के मजदूर-किसान धरने पर बैठे:देवरिया में बकाया भुगतान और जांच की मांग की, कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन