नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, आधुनिक ILS कैट-III सिस्टम:कोहरे में सुरक्षित लैंडिंग, पायलटों को मिलेगी मदद, शिकागो, लॉस एंजिल्स जैसे एयरपोर्ट की सूची में शामिल


28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन के साथ नोएडा इंटरनेशनल एयारपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) देश के सबसे आधुनिक एयरपोर्ट में शामिल हो जाएगा। पहले फेज में यहां 3.9 किलोमीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा रनवे तैयार किया गया है, जहां विमान समानांतर रूप से उड़ान भरने और लैंडिंग करने में सक्षम होंगे।
एयरपोर्ट पर अत्याधुनिक इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) कैट-III लगाया गया है। जिसकी मदद से घने कोहरे, कम विजिबिलिटी और बारिश के दौरान भी विमान सुरक्षित तरीके से उतर सकेंगे।
देश में तीसरा एयरपोर्ट जहां मिलेगी यह सुविधा
भारत में फिलहाल समानांतर उड़ान और लैंडिंग की सुविधा मुख्य रूप से इंदिरा गांधाी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (दिल्ली) और छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट (मुंबई) पर है। अब जेवर एयरपोर्ट भी इस सूची में शामिल हो जाएगा। दिल्ली एयरपोर्ट के चार रनवे एक साथ कई उड़ानों को संभाल सकते हैं, जबकि मुंबई एयरपोर्ट पर भी समानांतर संचालन होता है। जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने से उत्तर भारत में हवाई यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है। एक घंटे में 30 विमान का संचालन संभव
एयरपोर्ट को पूरी क्षमता से संचालित किए जाने पर यहां एक घंटे में करीब 30 विमान लैंडिंग और टेकऑफ कर सकेंगे। उद्घाटन के बाद तकनीकी टीम इसके लिए ट्रायल और ऑपरेशनल टेस्टिंग शुरू करेगी। जेवर एयरपोर्ट पर लगाया गया ILS कैट-III सिस्टम इतना उन्नत है कि पायलट बेहद कम दृश्यता में भी विमान उतार सकते हैं। ऐसे हालात में पायलट पूरी तरह इस तकनीक पर निर्भर रहते है। दुनिया के कुछ ही एयरपोर्ट पर समानांतर लैंडिंग
विदेशों में शिकागो ओ”हेयर (ओआरडी), लॉस एंजिल्स (एलएएक्स) और सैन फ्रांसिस्को (एसएफओ) पर समानांतर उड़ान और लैंडिंग की सुविधा है। सैन फ्रांसिस्को में 750 फीट की दूरी पर स्थित रनवे 28 एल और 28 आर पर एक साथ उड़ान और लैंडिंग की जाती है।
6 रनवे के साथ एशिया का बड़ा एयरपोर्ट बनने की तैयारी
जेवर एयरपोर्ट को चार चरणों में विकसित किया जा रहा है। पहले चरण में एक रनवे तैयार हुआ है, जबकि आगे चलकर यहां कुल 6 रनवे बनाए जाएंगे।

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