नेपाली पीएम ने भारतीय राजदूत से मुलाकात की:पहली बार किसी विदेशी डिप्लोमेट से अकेले मिले; कुछ देर में चीनी राजदूत से मिलेंगे


नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने सोमवार को भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव से मुलाकात की। प्रधानमंत्री बनने के बाद किसी विदेशी राजदूत के साथ शाह की यह पहली वन-टू-वन मुलाकात है। नवीन श्रीवास्तव ने शाह को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी। उन्होंने भारत की ओर से नेपाल के साथ अच्छे रिश्ते और सहयोग को आगे बढ़ाने की बात कही। दोनों के बीच भारत-नेपाल संबंधों, विकास सहयोग और आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा हुई। बालेन ने भारत के साथ नेपाल के पुराने और मजबूत रिश्तों को और आगे बढ़ाने की जरूरत बताई। दोनों देशों के बीच व्यापार, बिजली, सड़क-कनेक्टिविटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरे विकास कार्यों में सहयोग होता रहा है। आज चीन के राजदूत, कल अमेरिकी अधिकारी से मुलाकात भारतीय राजदूत से मुलाकात के बाद शाह सोमवार को चीन के राजदूत झांग माओमिंग से भी मिलेंगे। मंगलवार को उनकी अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी स्कॉट अर्बोम के साथ वन-टू-वन बैठक होगी। यानी शाह लगातार तीन दिनों में नेपाल के तीन अहम साझेदार देशों के प्रतिनिधियों से सीधे बातचीत कर रहे हैं। इन बैठकों में द्विपक्षीय रिश्तों के साथ विकास, कनेक्टिविटी, आर्थिक सहयोग और मौजूदा मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। पहले विदेशी अधिकारियों से अकेले नहीं मिलते थे शाह प्रधानमंत्री बनने के शुरुआती दौर में शाह ने विदेश मंत्री के स्तर से नीचे के विदेशी अधिकारियों से वन-टू-वन मुलाकात नहीं करने की नीति अपनाई थी। वह विदेशी राजदूतों के साथ सामूहिक बैठकों को प्राथमिकता देते थे। इसी वजह से भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री की 11-12 मई की नेपाल यात्रा के दौरान भी शाह से उनकी अकेले में मुलाकात नहीं हो सकी थी। शाह ने अमेरिकी अधिकारियों समीर पॉल कपूर और सर्जियो गोर से मुलाकात के अनुरोध भी स्वीकार नहीं किए थे। इसके बजाय शाह ने 9 अप्रैल और 26 मई को काठमांडू में तैनात कई देशों के राजदूतों के साथ सामूहिक बैठकें की थीं। बालेन ने 100 दिन बाद बदली रणनीति बालेन की सामूहिक बैठकों की नीति को नेपाल के कई राजनयिकों और विदेश नीति के जानकारों ने सभी देशों के साथ बराबरी का संदेश देने वाला कदम बताया था। लेकिन सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद शाह के सलाहकारों ने उन्हें घरेलू और विदेशी स्तर पर अलग-अलग लोगों से मिलने की सलाह दी। इसके बाद उन्होंने मधेश के नेताओं और सांसदों के अलावा कारोबारियों, उद्योगपतियों, ठेकेदारों और निर्यातकों से भी अलग-अलग मुलाकातें शुरू कीं। विदेशी राजदूतों के साथ वन-टू-वन बैठकें भी इसी बदली हुई रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *