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रायबरेली में गुरुवार को बासंती बयार और हिंदू नववर्ष के उल्लास के बीच चैत्र नवरात्रि का भव्य शुभारंभ हुआ। सुबह की पहली किरण के साथ ही शहर के मंदिर शक्ति की आराधना में सराबोर नजर आए। मंशा देवी मंदिर और आईटीआई परिसर स्थित मां दुर्गा मंदिर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं। भोर से मंदिरों के कपाट खुलते ही जयकारों की गूंज फैल गई। श्रद्धालु हाथों में जल से भरा कलश, नारियल और लाल चुनरी लेकर पूजन के लिए पहुंचे। आईटीआई परिसर स्थित दुर्गा मंदिर में कतारें मुख्य सड़क तक दिखाई दीं। सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। मां शैलपुत्री की आराधना और व्रत संकल्प श्रद्धालुओं ने आदि शक्ति के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री का आह्वान किया और अखंड ज्योति प्रज्वलित कर नौ दिनों के कठिन व्रत का संकल्प लिया। मां शैलपुत्री स्थिरता की प्रतीक मानी जाती हैं और योग शास्त्र के अनुसार उनका संबंध मूलाधार चक्र से है। उनकी पूजा से आत्मविश्वास और मानसिक दृढ़ता का संचार होता है। नववर्ष और शरीर की शुद्धि का प्रतीक चैत्र नवरात्रि के पहले दिन से ही हिंदू कैलेंडर के अनुसार नया साल शुरू होता है। यह समय नई ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह मौसम बदलने का ‘संधिकाल’ है, जब उपवास से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और पाचन तंत्र को आराम मिलता है। मंदिरों में सजावट और प्रशासनिक इंतजाम मंशा देवी मंदिर में विशेष फूलों की सजावट भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र रही। शहर के अन्य मंदिरों और पंडालों में दुर्गा पूजा और आरती की गूंज सुनाई देने लगी। स्थानीय प्रशासन ने भी सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए, ताकि मंदिरों में उमड़ने वाली भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।
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नवरात्रि का पहला दिन, मां शैलपुत्री की पूजा:रायबरेली के दुर्गा मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़