जाली नोट कांड- नेपाल से कनेक्शन निकाल रही SIT:सहारनपुर के 3 बैंक अफसरों पर लुकआउट नोटिस, प्राइवेट कर्मी लापता, सालभर के फुटेज खंगाले


सहारनपुर के पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के करेंसी चेस्ट से जुड़े करीब 17 करोड़ 29 लाख रुपए की नकली करेंसी के मामले में नए खुलासे हो रहे हैं। अब इस मामले की जांच सिर्फ करेंसी चेस्ट में नकली नोटों की मौजूदगी और बैंकिंग रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रह गई है। पुलिस को शक है कि इस पूरे मामले के तार नेपाल तक जुड़े हो सकते हैं। इसी आशंका और नामजद आरोपियों के देश से बाहर भागने की संभावना को देखते हुए पुलिस ने PNB के वरिष्ठ मंडल प्रबंधक रवि कुमार कांसे, सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट के प्रबंधक सुशील कुमार और जगाधरी करेंसी चेस्ट के प्रबंधक अमित कुमार के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किए हैं। पुलिस इनकी तलाश के साथ इनके संपर्कों, आर्थिक गतिविधियों और पिछले कुछ समय की आवाजाही का रिकॉर्ड भी खंगाल रही है। जांच में एक और नाम आदेश का सामने आया है। बताया जा रहा है कि जब अमित कुमार सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट के प्रबंधक थे, तब उन्होंने आदेश नाम के व्यक्ति को अपने निजी कामों के लिए रखा था। फिलहाल ये प्राइवेट कर्मचारी आदेश भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। जांच एजेंसियां ये पता लगाने में जुटी हैं कि आदेश की भूमिका क्या थी और वह अमित कुमार समेत अन्य संदिग्धों के संपर्क में किस तरह था। 17.29 करोड़ की नकली करेंसी ने खोली जांच की बड़ी कड़ी सहारनपुर में पीएनबी के करेंसी चेस्ट से जुड़े मामले में बड़ी मात्रा में नकली भारतीय करेंसी सामने आने के बाद पुलिस और एजेंसियों ने जांच तेज कर दी। मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही बना कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट बैंकिंग सिस्टम से जुड़े करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। जांच आगे बढ़ी तो शक का दायरा करेंसी चेस्ट के प्रबंधन से जुड़े लोगों तक पहुंचा। पुलिस अब ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नकली नोटों की एंट्री, उनके रखे जाने और बैंकिंग प्रक्रिया में आगे बढ़ने के दौरान कौन-कौन से स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई। इसी क्रम में नामजद आरोपियों के घरों पर भी तलाशी ली गई। एसआईटी और क्राइम ब्रांच की टीमों ने वहां से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और महत्वपूर्ण दस्तावेज कब्जे में लिए हैं। इनकी जांच अब केस की अगली कड़ियां तलाशने के लिए की जा रही है। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से तलाशा जा रहा नेटवर्क जांच एजेंसियों का फोकस अब डिजिटल साक्ष्यों पर भी है। बरामद मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपियों के बीच किस तरह का संपर्क था और वे किन लोगों के संपर्क में थे। पुलिस ये भी देख रही है कि संदिग्धों की बातचीत में ऐसे लोगों का कोई जिक्र तो नहीं मिलता, जिनका संबंध नकली करेंसी की सप्लाई, आवाजाही या खपाने से हो। फोरेंसिक जांच से डिजिटल डाटा, संपर्कों और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल के बाद जांच को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है। अमित के निजी कर्मचारी आदेश की तलाश क्यों अहम? जांच के दौरान अमित कुमार से संबंधित एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट में प्रबंधक रहने के दौरान अमित ने आदेश नाम के व्यक्ति को निजी कामों के लिए रखा था। अब आदेश का अचानक लापता होना जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण है। पुलिस ये जानना चाहती है कि अमित के लिए आदेश किस तरह के काम करता था, उसका किन लोगों से संपर्क था और वह करेंसी चेस्ट के अधिकारियों या अन्य संदिग्ध व्यक्तियों के संपर्क में आता-जाता था या नहीं। आदेश के मोबाइल नंबर, कॉल डिटेल, संपर्कों और आवाजाही की जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है। अगर उसके संपर्कों से किसी संदिग्ध नेटवर्क की कड़ी मिलती है तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है। सोफिया मार्केट का करेंसी चेस्ट जांच के केंद्र में घंटाघर क्षेत्र स्थित सोफिया मार्केट का पीएनबी करेंसी चेस्ट इस पूरे मामले में जांच का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। एसआईटी यहां बैंकिंग दस्तावेजों और करेंसी चेस्ट से संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि करेंसी चेस्ट में नकदी के आने-जाने, गिनती, मिलान और अन्य प्रक्रियाओं के दौरान क्या-क्या हुआ था। साथ ही उन लोगों की पहचान भी की जा रही है, जिनकी किसी न किसी स्तर पर इस व्यवस्था तक पहुंच थी। करीब एक साल की CCTV फुटेज में तलाशे जा रहे चेहरे जांच का एक बड़ा हिस्सा CCTV फुटेज की पड़ताल पर भी टिका है। पुलिस करीब एक साल की CCTV रिकॉर्डिंग खंगाल रही है। इस फुटेज के जरिए करेंसी चेस्ट और उससे जुड़े स्थानों पर आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों का मिलान किया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह देख रही हैं कि नामजद आरोपी किन लोगों से मिलते थे, कौन लोग रोजाना इन स्थानों पर आते थे और क्या किसी संदिग्ध व्यक्ति की आवाजाही बार-बार दिखाई देती है। अगर CCTV फुटेज में किसी व्यक्ति या वाहन की संदिग्ध गतिविधि सामने आती है तो उसे मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल जैसे दूसरे साक्ष्यों से मिलाया जा सकता है। आलीशान कोठी और संपत्तियों तक पहुंची जांच जांच का दायरा केवल बैंकिंग रिकॉर्ड तक नहीं है। जगाधरी में अमित कुमार की आलीशान कोठी और अन्य संपत्तियां भी जांच के दायरे में हैं। पुलिस और जांच एजेंसियां ये देख रही हैं कि उनकी संपत्तियों और आर्थिक गतिविधियों का नकली करेंसी से जुड़े मामले से कोई संबंध है या नहीं। इसके लिए बैंक खातों, बड़े वित्तीय लेनदेन और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां नकली करेंसी के संभावित नेटवर्क की आर्थिक कड़ी भी तलाश रही हैं। नेपाल जाने की आशंका से लुकआउट नोटिस जांच के बीच पुलिस को आशंका है कि रवि कुमार कांसे, सुशील कुमार और अमित कुमार देश से बाहर निकलकर नेपाल जाने की कोशिश कर सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए तीनों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है। इसका मकसद ये है कि यदि इनमें से कोई व्यक्ति देश से बाहर जाने की कोशिश करता है तो संबंधित एजेंसियों को इसकी जानकारी मिल सके और उसे जांच के दायरे में लाया जा सके। पुलिस इन तीनों की तलाश के साथ उनकी हाल की गतिविधियों, संपर्कों और यात्रा संबंधी जानकारी भी जुटा रही है। नेपाल कनेक्शन खोज रही एसआईटी सहारनपुर के जाली नोट मामले की जांच के बीच नेपाल कनेक्शन सामने आने से जांच एजेंसियों ने पुराने मामलों की फाइलें भी खंगालनी शुरू कर दी हैं। इस कड़ी में सिद्धार्थनगर के डुमरियागंज में 29 जुलाई 2008 में सामने आया जाली नोट कांड को जोड़कर देख रही है। इससे तीन दिन पहले, 26 जुलाई को एटीएस ने तत्कालीन कैशियर सुधाकर त्रिपाठी, आबिद अली और रामशंकर सिंह के कब्जे से भी जाली नोट बरामद किए थे। उस समय एसबीआई के करेंसी चेस्ट से करीब चार करोड़ दो लाख रुपए के जाली नोट बरामद हुए थे। जांच में नेपाल के रास्ते नकली भारतीय मुद्रा भारत में पहुंचाने की आशंका सामने आई थी। अब सहारनपुर के मामले में नेपाल से जुड़ी नई कड़ी मिलने के बाद एजेंसियां ये पता लगाने में जुटी हैं कि क्या दोनों मामलों के बीच कोई समानता है या दोनों घटनाएं अलग-अलग हैं। मामले की जांच सीबीआई ने की थी। जांच में नेपाल के रास्ते नकली भारतीय मुद्रा भारत में लाकर उसे खपाने की आशंका सामने आई थी। उस समय नेपाल में बैठे आईएसआई से जुड़े लोगों की भूमिका की आशंका भी जांच का हिस्सा बनी थी। बाद में विशेष सीबीआई कोर्ट ने 18 जनवरी 2012 को तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया था। कोर्ट ने उन्हें छह-छह वर्ष के कठोर कारावास और पांच-पांच लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी। 31 जुलाई की गिरफ्तारी ने बढ़ाया शक नेपाल कनेक्शन को लेकर जांच एजेंसियों का ध्यान सहारनपुर में पढ़ने वाले दो छात्रों की गिरफ्तारी की ओर भी गया है। 31 जुलाई को सहारनपुर की ग्लोकल यूनिवर्सिटी में बीएएमएस की पढ़ाई कर रहे दो छात्रों को नेपाल के रूपन्देही में भारतीय जाली नोटों के साथ पकड़े जाने की जानकारी सामने आई थी। इनमें एक छात्र सिद्धार्थनगर का अभिषेक कसौधन और दूसरा महाराष्ट्र का रहने वाला यश बताया गया है। दोनों बीएएमएस के तीसरे सेमेस्टर में पढ़ते थे और रेलवे स्टेशन के आसपास प्रैक्टिस भी करते थे। अब जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि छात्रों की नेपाल यात्रा और सहारनपुर के जाली नोट मामले के बीच कोई कनेक्शन था या नहीं। अभिषेक की नेपाल यात्रा भी जांच में जांच में अभिषेक की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। जानकारी के अनुसार, 20 मई को वह पशुपतिनाथ मंदिर में दर्शन के लिए नेपाल गया था। नेपाल से लौटने के बाद वह दो दिन अपने घर पर रहा और इसके बाद सहारनपुर जाने की बात कहकर निकल गया। बाद में उसके नेपाल में जाली भारतीय मुद्रा के साथ पकड़े जाने की जानकारी सामने आई। अब जांच एजेंसियां उसके और उसके साथी के मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल, बैंक खातों में हुए लेनदेन, सहारनपुर के संपर्कों और नेपाल आने-जाने के रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही हैं। इससे पहले के केस जानिए

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