AI से पढ़ाई आसान, लेकिन छात्रों की सोच पर असर:मेरठ में टीचर्स डे पर शिक्षकों ने बताया नया चैलेंज, बोले-AI के दौर में छात्रों ने सोचना छोड़ा


बदलती टेक्नोलॉजी के साथ छात्रों की पढ़ाई का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। AI ने जहां कुछ सेकंड में नोट्स, जवाब और रिसर्च उपलब्ध कराना आसान कर दिया है, वहीं शिक्षकों के सामने छात्रों की सोचने की ताकत को बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। शिक्षक दिवस के मौके पर शिक्षकों ने बताया कि आज के छात्र टेक्नोलॉजी के लिहाज से पहले से कहीं ज्यादा एडवांस हैं, लेकिन कई मामलों में वे अपने दिमाग से सोचने के बजाय AI पर निर्भर होते जा रहे हैं। पत्रकारिता के शिक्षक विभोर गौड़ ने बताया कि पहले मोबाइल नंबर से लेकर पहाड़े तक याद रखना जरूरी होता था। धीरे-धीरे कैलकुलेटर और मोबाइल ने याद रखने की जरूरत कम कर दी। अब AI ने सोचने के तरिके को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चिंता यह है कि छात्र अपने नए विचारों पर भरोसा करने के बजाय सीधे AI से जवाब लेने लगे हैं। यहां तक कि जब छात्रों से उनके ख्वाब और सपनों के बारे में लिखने को कहा गया, तो कुछ छात्रों ने उसके लिए भी AI की मदद ली। उनका कहना है कि AI का इस्तेमाल होना चाहिए, लेकिन छात्रों को अपनी सोच और फील्ड वर्क को छोड़ना नहीं चाहिए। विभोर गौड़ ने यह भी कहा कि AI के कारण टैलेंट के साथ एक नई चुनौती सामने आई है। जो छात्र खुद सोचकर लिखते हैं, उन्हें कई बार उन छात्रों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है जो AI की मदद से बेहतर भाषा और प्रस्तुति तैयार कर लेते हैं। प्रोफेसर तनु शर्मा ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या यह देखने को मिल रही है कि छात्र अपना दिमाग इस्तेमाल करना भूलते जा रहे हैं। ग्रेजुएशन के शुरुआती साल में पहुंचने वाले कई छात्रों को भी कई बुनियादी चीजों की जानकारी नहीं होती। उनका मानना है कि AI पर अत्यधिक निर्भरता इसका एक बड़ा कारण है। उन्होंने सुझाव दिया कि क्लास में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सकती है। शुरुआत में छात्रों को परेशानी होगी, लेकिन धीरे-धीरे वे बिना मोबाइल के सोचने और काम करने के आदी हो सकते हैं। वहीं डॉ. प्रियंका राणा, एसोसिएट प्रोफेसर ने बताया कि आज के छात्र काफी प्रैक्टिकल और टेक्नोलॉजी से अच्छी तरह लैस हैं, लेकिन क्लासरूम में एक अलग चुनौती सामने आ रही है। कई छात्रों को लगता है कि उन्हें शिक्षक से ज्यादा जानकारी है, क्योंकि वे ChatGPT और दूसरे AI प्लेटफॉर्म से तुरंत जवाब और नोट्स तैयार कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि AI के जवाब हमेशा पूरी तरह सही हों, यह जरूरी नहीं है। शिक्षक अपने अनुभव और वास्तविक उदाहरणों के साथ किसी विषय को जिस तरह समझाते हैं, वह AI से अलग है। इसलिए छात्रों को अपने शिक्षकों पर भरोसा विकसित करने और AI को केवल एक सहायक माध्यम के रूप में इस्तेमाल करने की जरूरत है।

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