जन्मदिवस पर धर्माचार्य की अनूठी पहल:वानप्रस्थ धाम में किया पौधा रोपण, 45 बुजुर्गों का किया सम्मान


मथुरा वृंदावन के प्रसिद्ध धर्माचार्य भागवत प्रवक्ता ने अपने जन्मदिन पर अनूठी पहल कर समाज को संदेश देने की कोशिश की। धर्माचार्य ने अपने 45 वें जन्मदिन पर 45 पौधा रोपित किए तो 45 बुजुर्गों का सम्मान भी किया। इस अवसर पर संत समागम और विद्वत गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। धर्माचार्य की का पहल की साधु संत और विद्वानों के सराहना की। धर्माचार्य ने जन्मदिवस को सेवा संकल्प दिवस के रूप में मनाया। भगवान शिव का किया रुद्राभिषेक वृन्दावन स्थित वानप्रस्थ धाम के संस्थापक एवं भागवत प्रवक्ता डॉ चतुर नारायण पाराशर का 45वाँ जन्मदिवस व्यक्तिगत उत्सव के स्थान पर सेवा संकल्प दिवस के रूप में श्रद्धा, सेवा एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आश्रम में सेवा, धर्म और अध्यात्म से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रमों का शुभारंभ भगवान शिव के रुद्राभिषेक से हुआ। इसके पश्चात शांति यज्ञ आयोजित कर विश्व कल्याण, सुख-शांति एवं सभी के मंगल की कामना की गई। सेवा संकल्प दिवस की कड़ी में मूक-बधिर एवं दिव्यांग बच्चों को पाठ्य सामग्री एवं स्कूल बैग वितरित किए गए। इसके पश्चात राजदेवी स्मृति उपवन में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। वानप्रस्थ धाम आश्रम में संत समागम एवं विद्वत संगोष्ठी आयोजित हुई। वैदिक मंगलाचरण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में 45 वरिष्ठजनों को शॉल, श्रीफल, मिष्ठान एवं सम्मान-पत्र प्रदान कर सम्मानजत किया गया। वरिष्ठजनों द्वारा 45 सेवा-ज्योतियों का प्रज्ज्वलन भी किया गया। इस अवसर पर मानव जीवन में चार आश्रमों का महत्व विषय पर आयोजित विद्वत संगोष्ठी में संतों, धर्माचार्यों एवं विद्वानों ने भारतीय संस्कृति में ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास आश्रम की महत्ता तथा वर्तमान समय में वानप्रस्थ परंपरा की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए। यह रहे मौजूद समारोह में नाभा पीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु सुतीक्ष्ण दास देवाचार्य महाराज, पीपा द्वाराचार्य बलराम दास देवाचार्य महाराज, भागवत भास्कर कृष्ण चंद्र ठाकुर जी महाराज, श्रीमज्जगद्गुरु विजयराम देवाचार्य भैया जी महाराज, पुराणाचार्य मनोज मोहन शास्त्री, महामंडलेश्वर विवेकानंद महाराज हरिद्वार, महामंडलेश्वर कृष्णानंद महाराज, गौरी शंकर धाम के संस्थापक पूज्य डॉ. शिवम साधक महाराज तथा डॉ. श्री अभिषेक कृष्ण महाराज, पुराण मनीषी आचार्य प्रवर कौशिक महाराज सहित अनेक संत, विद्वान उपस्थित रहे।

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