गोरे बच्चे की चाहत में नेपाली लड़कियों का सौदा हो रहा है। यूपी से सटे नेपाल बॉर्डर से इन लड़कियों को लाया जाता है। बिना शादी बच्चा करने के बदले दलाल को 1 करोड़ रुपए तक दिए जा रहे हैं। इसमें लड़की को केवल 20 से 25 लाख रुपए मिलते हैं।
.
ऐसे दंपती जिनकी संतान नहीं है, उनमें बच्चा करने का नया ट्रेंड देखने को मिला है। ये IVF से बच्चा करने के बजाय नेपाली युवतियों से बच्चा कर रहे हैं। इनमें ज्यादातर मामले ऐसे दंपतियों के हैं, जहां महिला गर्भधारण करने में सक्षम नहीं है। IVF में केस बिगड़ने और बच्चे के कमजोर पैदा होने की आशंका भी रहती है।
नेपाल से दलालों के जरिए मोटी रकम देकर लड़कियों को भारत लाया जाता है। उन्हें एक से डेढ़ साल तक यहीं रखा जाता है। संबंध बनाकर गर्भधारण कराया जाता है। बच्चा होने के बाद वापस नेपाल भेज दिया जाता है।
दैनिक भास्कर ने इस ट्रेंड का खुलासा किया। जरूरतमंद दंपती के रिश्तेदार बनकर नेपाल गए। उस गिरोह तक पहुंचे, जो लड़कियों का सौदा कर रहा है। ये गिरोह कैसे काम करता है? किस तरह की लड़कियां इसमें शामिल हैं? पढ़िए, पूरा इन्वेस्टिगेशन…

नेपाल में हमारी मुलाकात इन तीन दलालों से हुई। ये दीपू, ओम और सुषमा थापा हैं।
यूपी से लगी इंडो-नेपाल बॉर्डर के एक सोर्स के जरिए हमें नेपाल की एजेंट सुषमा थापा का पता चला। वह बॉर्डर से 35 किमी अंदर नेपाल के भुटवल में थी। सुषमा नेपाली लड़कियों की सप्लाई करने वाले गिरोह के लिए एजेंट की तरह काम करती है। हमने उसे कॉल करके बताया कि एक अमीर दंपती है। 8 साल पहले शादी हो चुकी है, लेकिन पत्नी को गर्भ नहीं ठहर पा रहा। वह चाहते हैं कि कोई लड़की उनसे संबंध बनाकर प्रेग्नेंट हो और उनके बच्चे को जन्म दे।
इस बारे में हमारी सुषमा से कई बार बात हुई। उसे जब भरोसा हो गया कि यह वास्तविक केस है और धोखे की संभावना नहीं है, तब जाकर वह मिलने को राजी हुई। हमने वहां जाकर सुषमा से बात की।

सुषमा : लड़की के साथ में कौन रहेगा?
रिपोर्टर : फैमिली मेंबर्स रहेंगे। उसकी केयर भी तो करनी पड़ेगी।
सुषमा : हां… सर, यह तो है, क्योंकि उसका कांच से भी ज्यादा ध्यान रखना पड़ेगा।
रिपोर्टर : क्या लड़की फिजिकल होने को तैयार हो जाएगी?
सुषमा : पैसा मिलेगा तो फिजिकल होगी ही न। देखिए सर, हमने आपको बताया था कि मैंने 2 साल पहले ऐसे मामले में एक करोड़ रुपए लिए थे। लड़की कम पर मान नहीं रही थी। कहती थी… मैं रिस्क ले रही हूं। इसमें मेरी जान भी जा सकती है। मैंने भरोसा दिलाया था कि कुछ नहीं होगा। उसका ऑपरेशन हुआ था।
रिपोर्टर : अरे, अब तो बहुत ईजी हो गया है। केयर अगर अच्छे से हो जाए तो कोई दिक्कत नहीं होती है।
सुषमा : केयर तो ऐसी हुई थी न सर कि पार्टी ने इतना ड्राई फ्रूट और फ्रूट खिला दिया कि उसका वेट काफी बढ़ गया था। चलना-फिरना भी बंद हो गया था। खैर, अब तो उसकी शादी भी हो गई है। दोबारा मैंने उसको एक बार फिर बोला था, इसी काम के लिए, लेकिन उसने मना कर दिया था।
अब हमने यह जानना चाहा कि ये लड़कियां नेपाल के किस एरिया से आती हैं? दलाल उनके परिवार को लड़कियों की सप्लाई के लिए कैसे राजी करते हैं? क्या उन्हें ले जाने के लिए किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है? पढ़िए आगे की बातचीत…

रिपोर्टर : ये जो लड़कियां हैं, वो पहाड़ों से ही आएंगी?
सुषमा : पहाड़ों की भी हो सकती हैं। पालपा या पोखरा, या उससे भी आगे की हो सकती हैं।
रिपोर्टर : मतलब होंगी पहाड़ी ही। हम लोगों को क्या पहाड़ पर ही जाना होगा?
सुषमा : नहीं सर, हम यहीं बुलवा देंगे। अगर आप कहेंगे।
रिपोर्टर : ठीक है, लेकिन बस कोई धोखाधड़ी न हो।
सुषमा : जब लड़की पसंद आ जाएगी, पेपर वर्क हो जाएगा। आप लेकर जाने लगेंगे, तब पैसा देंगे।
रिपोर्टर : पेपर वर्क में क्या होगा? गारंटी होती है न? इसमें कोई सरकारी परमिशन भी लेनी होती है क्या?
सुषमा : सर, दो तरीके होते हैं। एक विदआउट पेपर वर्क, जिसमें सिर्फ बातचीत हो गई और आपसी सहमति से लड़की को लेकर चले गए। दूसरा एक प्रॉपर एग्रीमेंट होगा, जिसमें दो फैमिली के बीच की डील होगी।
रिपोर्टर : बाद में इसका कुछ दुरुपयोग तो नहीं होगा?
सुषमा : नहीं सर, पेपर भी सिर्फ हमारे और आपके पास होगा। इससे पहले हमने लड़की को यूएस भेजा था। एग्रीमेंट में ही पूरी बातें क्लियर थीं। क्योंकि कभी-कभी कोई सनकी मिल जाता है, जो दावा करने पहुंच जाता है।

सुषमा कहती है कि कितनी भी बात साफ हो, लेकिन पैसे का लालच आने पर इंसान पलट जाता है।
नेपाल के पूरे नेटवर्क में घुसे भास्कर रिपोर्टर
करीब एक महीने की और बातचीत के बाद हमने सुषमा से यह कबूल करा लिया कि उसके साथ बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। हमने सुषमा से कहा कि इसमें कौन-कौन से लोग शामिल हैं? हमें सबसे मिलना पड़ेगा। क्योंकि, हमारे रिश्तेदार डील फाइनल कराने आएंगे, तो वह सबसे मिलेंगे।
पहले सुषमा तैयार नहीं हो रही थी। लेकिन, फिर किराए-भाड़े के नाम पर कुछ पैसों की डिमांड की। पैसा मिलने के बाद हमें दोबारा नेपाल बुलाया। उसने हमारी मुलाकात नेपाल के पोखरा के रहने वाले दो एजेंट्स दीपू और ओम से कराई।

रिपोर्टर : लड़की बॉर्डर पार कैसे करेगी, क्योंकि बड़ी सख्ती रहती है।
दीपू : (महिला दलाल की तरफ इशारा करते हुए) ये लोग निकाल ले जाएंगे। बॉर्डर क्रॉस करने में कोई दिक्कत नहीं होगी। बॉर्डर पार गाड़ी से आपके पास पहुंचा देगी। सब फाइनल होने से पहले जिन्हें लड़की की जरूरत है, उनसे हम लोग मिलेंगे।
रिपोर्टर : हां… हम मिलवाएंगे।
दीपू : देखिए, ऐसा न हो कि यहां से ले जाकर उसको बेच दें। या फिर उसे धंधे में लगा दें। उसको टॉर्चर किया जा रहा हो। अगर कोई दिक्कत हुई तो पुलिस हम लोगों को पकड़ेगी और केस होगा। ये ऐसा केस है कि अंदर चले गए तो छूटना मुश्किल है। भारत में जमानत करा सकते हैं, लेकिन नेपाल में नहीं होती है। हमको फुल इन्क्वायरी चाहिए। देखिए, लड़की के पिता नहीं हैं। सिर्फ मां है। इसलिए हमने उससे कहा था कि पहले तुम्हें घर दिखा देंगे। तुम देख लेना कि रह पाओगी या नहीं। तभी कन्फर्म करेंगे।
रिपोर्टर : बिल्कुल ठीक बात है। अच्छा, ये बताइए, क्या लड़की की मेडिकल रिपोर्ट भी बनेगी?
दीपू : आप टेंशन मत लीजिए, मेडिकल हम लोग कराकर देंगे।

दलाल ओम (टी-शर्ट और चश्मे में ) बताता है कि लड़की का घर काठमांडू में पहाड़ों के बीच है। यह सिलीगुड़ी बॉर्डर के पास है। दार्जिलिंग वहां से नजदीक है।
3 लड़कियों से बात कराई, दलाल बोले- उनसे पैसों की बात नहीं होगी
तीन एजेंट्स से मिलने के बाद हमें समझ आ चुका था कि यही तीनों नेपाली लड़कियों को पैसे का लालच देकर भारत भेजते हैं। हमने एजेंट्स से कहा कि अब उन लड़कियों से मिलना है और कन्फर्म करना है कि उन्हें गुमराह तो नहीं किया जा रहा है।
पहले तो एजेंट्स तैयार नहीं हुए। फिर उन्होंने शर्त रखी कि बातचीत में पैसों की डील का जिक्र नहीं होगा।
अब हम लड़कियों से मिलने नेपाल में एजेंट्स की बताई लोकेशन पर पहुंचे। शाम करीब 7 बजे तक इंतजार के बाद एजेंट्स ने हमें बताया कि जो लड़की नेपाल की पहाड़ियों से आ रही थी, वह लैंडस्लाइड हो जाने से फंस गई है। फिर उसने वीडियो कॉल पर बात कराई…

रिपोर्टर : कहां रहती हो, आपकी शादी हो गई है?
गीता : सिलीगुड़ी के पास वाले नेपाल में… हां हो गई।
रिपोर्टर : क्या इसके बावजूद आप सालभर रह लेंगी?
गीता : हां, मेरा तलाक हो चुका है। मैं 35 साल की हूं।
रिपोर्टर : तो फैमिली में और कौन-कौन हैं?
गीता : मेरी मम्मी है और 20 साल का बेटा है।
रिपोर्टर : तो उसको कोई दिक्कत तो नहीं होगी?
गीता : नहीं, उसको कोई दिक्कत नहीं होगी।
रिपोर्टर : परिवार में और कौन-कौन हैं?
गीता : मेरी मम्मी है और जो आपके साथ में है, वह मेरा बड़ा भाई है। यही मेरी फैमिली है।
रिपोर्टर : तो आपको भाई ने बताया है कि फिजिकल होना पड़ेगा?
गीता : हां, भाई ने बताया है।
रिपोर्टर : आपके फैमिली मेंबर में कोई आपके साथ जाएगा क्या?
गीता : हां… मेरी छोटी बहन जाएगी।
हमने एजेंट्स से कहा कि हमें कुछ और लड़कियों से मिलवाइए। एजेंट ने नेपाल के पहाड़ी इलाके में स्थित गुल्मी की रहने वाली 20 साल की रूबी थापा से हमारी मुलाकात कराई।

रिपोर्टर : कौन-कौन है फैमिली में?
रूबी : भाई, पापा, मम्मी, बहन। सब गांव पर खेती करते हैं। मैं 20 साल की हूं, भाई-बहन छोटे हैं।
रिपोर्टर : अभी क्या कर रही हो?
रूबी : फैक्ट्री में सामान की पैकिंग करती हूं।
रिपोर्टर : हम लोग क्यों मिल रहे हैं, तुम्हें पता है?
रूबी : हां, मतलब यंग लड़की चाहिए होगी न आपको? मेरी थोड़ी-बहुत हेल्थ प्रॉब्लम है, मैं स्ट्रॉन्ग नहीं हूं।
रिपोर्टर : अरे, पूरा ध्यान रखा जाएगा।
रूबी : ठीक है।
रिपोर्टर : पहले फिजिकल हो चुकी हो या नहीं?
रूबी : नहीं।
अगले दिन एजेंट सुषमा ने कॉल करके एक दूसरी नेपाली लड़की से मिलने के लिए बुलाया। लड़की का नाम रूपा थापा बताया गया। हालांकि, शाम 7 बजे तक वो नहीं आई। बताया कि तानसेन और पाल्पा साइड में लैंडस्लाइड हो गया। नेटवर्क को और करीब से जानने के लिए हमने एजेंट सुषमा से बातचीत जारी रखी।

रिपोर्टर : यहां बॉर्डर पर ऐसे चलता है क्या?
सुषमा : हां, हम पहले भी 5 बार लड़कियां भेज चुके हैं।
रिपोर्टर : तो इस काम में तुम अकेले रहती हो या फिर और लोग भी रहते हैं?
सुषमा : और लोग भी इन्वॉल्व रहते हैं।
रिपोर्टर: यहां IVF वाले भी तो कनेक्टेड होते होंगे। वहीं से तो ऐसे केस मिलते होंगे।
सुषमा : यहां IVF वाले खुद केस ले लेते हैं। उनके साथ हम नहीं करते, क्योंकि पैसा वगैरह मिलता नहीं है।
लड़कियों को सिर्फ 20 से 25% रकम देते हैं…
नेपाल की जरूरतमंद लड़कियां सिर्फ पैसों के लिए इस जाल में फंसती हैं। एजेंट उन्हें 20 से 25% रकम देकर बाकी हिस्सा खुद रखते हैं। इस गिरोह में कई लोग शामिल होते हैं। जो बचे हुए करीब 75 से 80 लाख रुपए बांट लेते हैं। लड़कियां इसलिए राजी हो जाती हैं, क्योंकि उनके लिए 20 से 25 लाख रुपए भी बड़ी रकम होती है। ये दलाल उनकी जान-पहचान के होते हैं। साल से डेढ़ साल किसी और के घर में रहने के लिए इन्हें भरोसा चाहिए होता है, जो ये दलाल देते हैं।
नेपाल की लड़की ही क्यों?
- गर्भधारण के लिए दूसरे देश की लड़की होने से बच्चा बड़ा होने के बाद असली मां की तरफ से क्लेम होने की गुंजाइश कम होती है।
- लोगों को लगता है कि इस तरह सामाजिक सुरक्षा बची रहेगी।
हालांकि, नेपाल की लड़की अगर अपने साथ अभद्रता या मारपीट की शिकायत दर्ज कराती है, तो मानव तस्करी में केस दर्ज किया जा सकता है।
——————————
यह खबर भी पढ़ें-
यूपी में रिश्वत ले रहे विधायक, ऑन-कैमरा बेनकाब, भाजपा विधायक ने खुद कैश लिया

यूपी में विधायक खुद विकास के नाम पर भ्रष्टाचार कर रहे हैं। सड़क, नाली और स्ट्रीट लाइट लगवाने के लिए ये अनुशंसा-पत्र तभी लिखते हैं, जब इन्हें 35% से 40% कमीशन मिलता है। अनुशंसा-पत्र विधायक का वह लेटर है, जिसके आधार पर CDO (चीफ डेवलपमेंट ऑफिसर) विधायक निधि से पैसा जारी करते हैं। पढ़िए, पूरा इन्वेस्टिगेशन…