चोरी करते पकड़े जाने पर पिटाई से हुई थी मौत:प्रयागराज में युवक की मौत का खुलासा, दो सगे भाई हिरासत में


प्रयागराज के होलागढ़ में दो दिन पहले संदिग्ध हाल में आशीष कुमार पटेल की मौत के मामले का खुलासा हो गया है। जांच में सामने आया है कि चोरी करते पकड़े जाने पर उसे पीटा गया और इसमें उसकी मौत हो गई। यह बात भी सामने आई है कि सूचना मिलने के बावजूद घरवाले रात में नहीं पहुंचे। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि समय रहते इलाज न मिल पाना भी उसके लिए घातक साबित हुआ। पुलिस ने इस मामले में दो सगे भाईयों को हिरासत में लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। यह घटना 11 मई की रात भगौवतीपुर खुटहना गांव में हुई थी। 12 मई की सुबह घरवन का पूरा, पूरबनारा गांव का रहने वाला 24 साल का आशीष मृत पड़ा मिला था। इस मामले में भाई बादल ने पड़ोसियों पर हत्या का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया। हालांकि पुलिस ने जांच की तो कुछ और ही कहानी सामने आई। एक दर्जन से ज्यादा चोटों के निशान दरअसल मृतक के शरीर पर एक दर्जन से ज्यादा चोटों के निशान मिले थे। उसे लाठी-डंडों से पीटा गया था। पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि घटना वाली रात आशीष अपने एक साथी एदल के साथ भगौतीपुर खुटहना गांव में गया था। वहां 1:30 बजे रात वह एक सब्जी की दुकान में घुस गया। इस पर दुकान मालिक तीन भाइयों ने उसे पकड़ लिया और इसके बाद उसे जमकर पीट दिया गया। पिटाई से अधमरा होने के बाद उसे वहीं छोड़ दिया गया। बाद में उसकी मौत हो गई। इससे पहले उसके पकड़े जाते ही दुकान के बाहर मौजूद उसका साथी भाग निकला। ऐसे हुआ खुलासा
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच शुरू की गई तो भाई बादल ने बताया कि घटना वाली रात उसके पास गांव के ही नंचू ने फोन किया था। उसने बताया था कि भगौतीपुर खुटहना गांव से उसके पास एक फोन आया, जिसमें बताया गया कि एक युवक चोरी करते पकड़ा गया है और पिटाई के बाद बेहोश हो गया है। बताए गए हुलिये के मुताबिक वह आशीष लग रहा है। हालांकि रात ज्यादा हो चुकी थी, ऐसे में वह परिवारवालों के साथ सुबह मौके पर पहुंचा तो भाई मृत पड़ा मिला। डीसीपी बोले
डीसीपी गंगानगर कुलदीप सिंह गुनावत ने बताया कि अभी तक कि जांच में जो बात सामने आई है, उससे यही पता चला है कि चोरी करते पकड़े जाने पर हुई पिटाई से युवक की मौत हुई। इस मामले में दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। घटना में कौन-कौन था, इसका पता लगाया जा रहा है। अब तक कि जांच में परिवारवालों की ओर से जो नामजदगी कराई गई थी, उसके सही होने के प्रमाण नहीं मिले हैं।

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