चूल्हे की एक चिंगारी ने उजाड़ दी पूरी दुनिया:बरेली में गरीब परिवार की झोपड़ी जलकर राख, बच्चों के पहनने तक के कपड़े नहीं बचे


बरेली के फतेहगंज पूर्वी थाना क्षेत्र के जिगनिया सादिक अली गांव में गुरुवार रात करीब साढ़े 10 बजे एक मामूली सी चिंगारी ने गरीब परिवार की पूरी जिंदगी बदल दी। परिवार रोज की तरह झोपड़ी में खाना बना रहा था। किसी ने सोचा भी नहीं था कि चूल्हे से निकली एक चिंगारी कुछ ही मिनटों में पूरे घर को आग के हवाले कर देगी। जब तक लोग कुछ समझ पाते, तब तक झोपड़ी धू-धू कर जलने लगी और परिवार की वर्षों की मेहनत से जोड़ी गई पूरी गृहस्थी राख में बदल चुकी थी। फूस की झोपड़ी होने से तेजी से फैली आग
गांव निवासी रामकिशोर अपने दो बेटों के परिवार के साथ फूस की झोपड़ी में रहते हैं। गुरुवार को घर में खाना बनाया जा रहा था। इसी दौरान चूल्हे से निकली चिंगारी झोपड़ी के छप्पर और अंदर रखे सामान पर जा गिरी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया। फूस और लकड़ी से बनी झोपड़ी होने के कारण लपटें तेजी से फैल गईं और पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया। इंजन, अनाज, बर्तन, कपड़े… कुछ भी नहीं बचा
आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि घर में रखा एक-एक सामान जल गया। खेती में इस्तेमाल होने वाला इंजन, कई महीने का अनाज, बर्तन, चारपाई, कपड़े और जरूरी घरेलू सामान सब कुछ आग की भेंट चढ़ गया। सबसे दर्दनाक बात यह रही कि परिवार के छोटे बच्चों के तन पर पहनने के लिए भी कपड़े नहीं बचे। वर्षों की मेहनत और जमा-पूंजी कुछ ही मिनटों में राख हो गई। आग की लपटें देख दौड़े ग्रामीण, घंटों की मशक्कत के बाद पाया काबू
झोपड़ी से उठती ऊंची लपटें और धुएं का गुबार देखकर गांव में अफरा-तफरी मच गई। आसपास के लोग बाल्टियों और उपलब्ध संसाधनों के साथ मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने घंटों तक लगातार प्रयास कर आग पर काबू पाया। अगर समय रहते ग्रामीण एकजुट होकर आग बुझाने नहीं पहुंचते तो आसपास की अन्य झोपड़ियां भी इसकी चपेट में आ सकती थीं। सूचना पर पहुंची पुलिस और फायर ब्रिगेड
घटना की जानकारी मिलते ही फतेहगंज पूर्वी थाना पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम गांव पहुंची। हालांकि तब तक ग्रामीणों की मदद से आग बुझाई जा चुकी थी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घटना की जानकारी ली और नुकसान का जायजा लिया। खुले आसमान के नीचे पहुंचा परिवार
आग बुझने के बाद जब परिवार ने अपनी झोपड़ी की ओर देखा तो वहां सिर्फ राख का ढेर बचा था। रहने का ठिकाना खत्म हो चुका था और रोजमर्रा के इस्तेमाल का कोई सामान नहीं बचा। अब परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है और उनके सामने दो वक्त की रोटी से लेकर बच्चों के कपड़ों तक का संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन से मदद की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता, राहत सामग्री और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि परिवार बेहद गरीब है और बिना सरकारी मदद के दोबारा अपनी गृहस्थी बसाना उनके लिए संभव नहीं होगा। फिलहाल गांव के लोग अपने स्तर पर परिवार की मदद करने में जुटे हैं, ताकि उन्हें तत्काल राहत मिल सके।

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