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यूपी सोनभद्र में झोलाछाप डॉक्टरों के चक्कर में मृत महिला को चिता से उठा लिया गया। परिजनों ने रात भर शव को घर में रखा। जब एमबीबीएस डॉक्टरों ने मृत घोषित किया, तब जाकर मौत से करीब 33 घंटे के बाद महिला के शव को दोबारा श्मशान घाट ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया। पति ने बताया– श्मशान घाट में शव को चिता पर रखते ही कुछ हलचल दिखी। गांव के दो वैद्यों ने नाड़ी चेक करके कहा– इसका शरीर तो गर्म है। ये तो अभी जिंदा है। इसीलिए मैं पत्नी को वापस घर ले आया था। घर लाकर दो निजी डॉक्टरों और एक सरकारी डॉक्टर को दिखा। उन्होंने भी मौत की पुष्टि की। फिर भी मन नहीं माना तो अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस मंगा ली। पर एंबुलेंस कर्मियों ने भी चेक करने के बाद मौत की पुष्टि की और अस्पताल ले जाने से इनकार कर दिया। महिला को कई दिनों से पीलिया और लीवर में सूजन की शिकायत थी। मामला जिला मुख्यालय से करीब 150 किलोमीटर दूर बभनी थाना क्षेत्र के कोंगा गांव का है। तस्वीरें देखिए– पूरा मामला सिलसिलेवार जानिए- बभनी थाना क्षेत्र के कोंगा गांव के पूर्व ग्राम प्रधान कृष्णानंद की पत्नी दुर्गावती (40) पिछले करीब एक सप्ताह से बीमार थीं। पति के मुताबिक, उन्हें पीलिया, प्लेटलेट्स की कमी, खून पतला होने और पित्त की थैली में सूजन की समस्या थी। पहले उनका इलाज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सागों बांध में कराया गया। आराम नहीं मिलने पर दुद्धी के डॉक्टर लवकुश को दिखाया गया। दवा बदलने के बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ। कृष्णानंद ने बताया– दुर्गावती की बहन ने मध्य प्रदेश के सागर में इलाज कराने की सलाह दी थी। इसके बाद वे बुधवार को दुर्गावती को लेकर सागर के लिए निकले थे। रास्ते में मध्य प्रदेश के व्यवहारी स्टेशन के पास बुधवार रात करीब 11:48 बजे उनकी मौत हो गई। इसके बाद परिजन शव लेकर गांव लौट आए। चिता पर रखने से पहले ग्रामीणों ने कहा- नाड़ी चल रही है परिजनों के मुताबिक, गुरुवार दोपहर करीब 3 से 4 बजे दुर्गावती की शवयात्रा पागन नदी के किनारे स्थित श्मशान घाट पहुंची। चिता तैयार की गई और अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू हो गई। शव को चिता पर रखने के दौरान दुर्गावती के शरीर में कुछ हलचल महसूस हुई। इसी दौरान गांव के कृष्णानंद यादव और रामानंद यादव ने शरीर में गर्माहट महसूस करने और नाड़ी चलने का दावा किया। उन्होंने परिजनों से कहा कि महिला जिंदा है, ऐसे में दाह संस्कार नहीं किया जाना चाहिए। इस बात के बाद परिजन अंतिम संस्कार रोककर दुर्गावती को घर ले आए। एंबुलेंस के लिए भी सूचना दी गई, लेकिन समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंची। इसके बाद परिजन उन्हें ट्रैक्टर-ट्रॉली से शाम करीब 6:30 बजे घर ले गए। दो निजी और एक सरकारी डॉक्टर को दिखाया घर पहुंचने के बाद परिजनों ने दो निजी डॉक्टरों और एक सरकारी डॉक्टर को बुलाकर दुर्गावती की जांच कराई। परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने भी महिला की स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। बाद में शरीर में कोई हलचल नहीं दिखाई दी। रात में एंबुलेंस–108 पर कॉल की। एंबुलेंस आई, पर कर्मचारियों ने शव जांचकर देखा तो मौत हो चुकी थी। इसलिए उन्होंने शव ले जाने से इनकार कर दिया और लौट गए। इसके बाद परिजनों ने शव को रातभर घर पर रखा। शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे शव को दोबारा श्मशान घाट ले जाया गया। करीब 2 किलोमीटर दूर पागन नदी के किनारे स्थित घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। डॉक्टर बोले- मरीज को हमने देखा ही नहीं बभनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी अधीक्षक डॉ. राजन सिंह ने बताया– उन्होंने महिला को नहीं देखा था, इसलिए उस समय उसकी स्थिति के बारे में वह कुछ नहीं बता सकते। उन्होंने कहा– मेडिकल तौर पर मौत के बाद व्यक्ति के जीवित होने की बात संभव नहीं है। ————————– ये खबर भी पढ़ें… शादी के 6 महीने बाद ही डाककर्मी की मौत:उन्नाव में ऑफिस से लौटते समय बाइक फिसली, लेखपाल बहन गोद में सिर रखकर रोई
उन्नाव में 32 साल के सरकारी कर्मचारी की सड़क हादसे में मौत हो गई। शुक्रवार रात एक बजे वह पोस्ट ऑफिस से काम निपटाकर बाइक से घर लौट रहे थे। तभी मोड़ पर बाइक फिसल गई। हेलमेट नहीं लगाए थे, सिर के बल गिरने से मौके पर ही मौत हो गई। पूरी खबर पढ़िए…
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चिता पर हिला महिला का शव..बिना जलाए घर ले आए:दो वैद्यों ने किया नाड़ी चलने का दावा, सोनभद्र में 3 डॉक्टरों की पुष्टि पर 33 घंटे बाद अंतिम संस्कार