घंटे घड़ियालों की ध्वनि से गूंजा ब्रज:खम्भ फाड़ प्रकट हुए नृसिंह देव,भक्तों ने लगाए जयकारे, जगह जगह हुई लीला


पुरुषोत्तम मास की चतुर्दशी को ब्रज भूमि घंटे घड़ियाल की ध्वनि से गूंज उठी। अवसर था भगवान नृसिंह देव के प्राकट्य का। मथुरा, वृंदावन सहित ब्रज के सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों पर भगवान नृसिंह का प्राकट्य उत्सव धूमधाम से मनाया गया। जगह जगह नृसिंह लीला का आयोजन हुआ। खम्भ फाड़कर जैसे ही नृसिंह देव प्रगट हुए जयकारों से माहौल गुंजायमान हो उठा। नृसिंह लीला देख भक्त आनंद में डूब गए। नृसिंह लीला देख भक्त हुए भाव विभोर शनिवार की देर शाम मथुरा वृंदावन में स्थान स्थान पर नृसिंह लीला का आयोजन किया गया। भगवान नृसिंह के स्वरूप में अभिनय करते लोगों ने ढोल नगाड़ों की धुन पर जमकर नृत्य किया। वृंदावन के अठखंभा,विद्यापीठ चौराहा,गोवर्धन गेट,रंगनाथ मंदिर सहित विभिन्न स्थानों पर नृसिंह लीला का आयोजन किया गया। जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे। हिरण्यकश्यप के खंभा में गदा मारते ही प्रगट हुए नृसिंह देव नृसिंह लीला की शुरुआत में हिरण्यकश्यप और भक्त प्रह्लाद का संवाद दर्शाया गया। उससे पहले भगवान गणेश जी के स्वरूप का पूजन किया गया। भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप के संवाद के दौरान जैसे ही हिरण्यकश्यप ने खंभे में गदा मारा वैसे ही भगवान नृसिंह देव अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए प्रगट हो गए। भगवान नारायण के इस अलग ही अवतार के दर्शन कर भक्त जयकारे लगाने लगे। भक्तों ने की महाआरती भगवान नृसिंह देव के प्रगट होने के बाद विजय घंट बजाए गए। भगवान नृसिंह देव की भक्तों ने महाआरती की। इसके बाद भगवान नृसिंह और गणेश जी के स्वरूपों ने नगर भ्रमण किया। नगर भ्रमण के दौरान जगह जगह भक्तों ने भगवान नृसिंह देव के स्वरूपों की आरती की। भक्तों में भगवान के चरण छूने की होड़ मची रही। अधिक माह में ही हुआ था भगवान नृसिंह देव का प्राकट्य भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नृसिंह देव को शक्ति,पराक्रम और अपने भक्तों की रक्षा के लिए जाना जाता है। भगवान नृसिंह देव का प्राकट्य उत्सव वैसे तो ज्येष्ठ माह में चतुर्दशी को मनाया जाता है। लेकिन उनका असली प्राकट्य उत्सव पुरुषोत्तम माह में ही हुआ था जो प्रत्येक 3 वर्ष में आता है। यही बजह रही कि इस बार भगवान नृसिंह देव का प्राकट्य उत्सव शनिवार को बड़े धूमधाम,उत्साह,उमंग और भक्ति के साथ मनाया गया।

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