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गोरखपुर के प्रतिष्ठित सराफ व्यवसायी, समाजसेवी और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े बाल कृष्ण सराफ को रविवार की शाम 4 बजे नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। सुबह गांधी गली स्थित उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए लोगों का तांता लगा रहा। परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों, व्यापारियों, समाजसेवियों, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों और शुभचिंतकों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद “राम नाम सत्य है” के जयघोष के बीच उनकी अंतिम यात्रा राजघाट श्मशान घाट के लिए रवाना हुई। अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब जैसे ही अंतिम यात्रा गांधी गली से आगे बढ़ी, बड़ी संख्या में लोग उसमें शामिल होते चले गए। व्यापारिक प्रतिष्ठान छोड़कर पहुंचे कारोबारी, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, मित्र और स्थानीय लोगों ने पैदल चलकर उन्हें अंतिम विदाई दी। पूरे मार्ग पर माहौल गमगीन रहा और लोगों ने हाथ जोड़कर दिवंगत आत्मा को श्रद्धासुमन अर्पित किए। अंतिम यात्रा में शामिल हर व्यक्ति के चेहरे पर उनके निधन का दुख साफ दिखाई दे रहा था। राजघाट पर बेटों ने दी मुखाग्नि राजघाट श्मशान घाट पहुंचने के बाद वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ बाल कृष्ण सराफ का अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। उनके पुत्र अतुल सराफ और अनूप सराफ ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान पूरा वातावरण भावुक हो गया और मौजूद लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। परिवार के सदस्यों को सांत्वना देने के लिए बड़ी संख्या में लोग अंतिम संस्कार स्थल पर मौजूद रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भेजा शोक संदेश उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाल कृष्ण सराफ के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उनके पुत्र अतुल सराफ के नाम शोक संदेश भेजा। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि बाल कृष्ण सराफ एक प्रमुख सराफ व्यवसायी होने के साथ-साथ सामाजिक जीवन में भी सक्रिय भूमिका निभाते थे। उन्होंने लिखा कि वे विश्व हिंदू परिषद से जुड़े रहे, श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में आजीवन सहभागी रहे और श्री गोरक्षपीठ के अनन्य भक्त थे। मुख्यमंत्री ने उनके निधन को व्यापार जगत ही नहीं, बल्कि सामाजिक संगठनों के लिए भी अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने महायोगी गुरु गोरखनाथ से दिवंगत आत्मा की चिरशांति तथा शोक संतप्त परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की। व्यापार और समाज सेवा दोनों में बनाई अलग पहचान
बाल कृष्ण सराफ ने व्यापारिक क्षेत्र के साथ-साथ सामाजिक और धार्मिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। वे अपने सरल व्यवहार, मिलनसार व्यक्तित्व और सेवा भावना के कारण शहर में विशेष सम्मान रखते थे। समाज के हर वर्ग के लोगों से उनका आत्मीय संबंध था। जरूरतमंदों की मदद करना और सामाजिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना उनकी पहचान थी। इसी कारण उनके निधन की खबर मिलते ही शहर के विभिन्न वर्गों में शोक की लहर दौड़ गई।
हर जुबान पर रही उनकी सादगी और सेवा की चर्चा
अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार में मौजूद लोगों ने बाल कृष्ण सराफ को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने व्यवहार, ईमानदारी और समाज के प्रति समर्पण से लोगों के दिलों में खास जगह बनाई थी। लोगों ने कहा कि उनका जाना केवल सराफ परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे गोरखपुर के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण रही कि उन्होंने अपने जीवन में लोगों का अपार स्नेह, सम्मान और विश्वास अर्जित किया था।
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