गिलगित-बाल्टिस्तान को 5वां राज्य बनाने की तैयारी में पाकिस्तान:विधानसभा में प्रस्ताव पास, संसद से संविधान संशोधन की मांग


पाकिस्तान ने अपने अवैध कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान को देश का पांचवां प्रांत बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। गुरुवार को गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा में इसे लेकर एक जॉइंट रेजोल्यूशन निर्विरोध पास किया गया। इस प्रस्ताव में पाकिस्तान सरकार से संविधान में संशोधन कर इस क्षेत्र को औपचारिक रूप से प्रांत घोषित करने की मांग की गई है। प्रस्ताव की कॉपी पर मुख्यमंत्री, स्पीकर, डिप्टी स्पीकर, नेता विपक्ष और दो निर्दलीय विधायकों के हस्ताक्षर हैं। इसे अब पाकिस्तानी संसद के पास भेजा जाएगा। प्रस्ताव में मांग की गई है कि गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान की नेशनल असेंबली और सीनेट में भी प्रतिनिधित्व दिया जाए। अभी तक पाकिस्तान में केवल चार प्रांत पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा हैं। पिछले महीने गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव हुए थे गिलगित-बाल्टिस्तान में पिछले महीने 7 जून चुनाव हुआ था जिसमें बिलावल भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) को सबसे ज्यादा सीटें मिली थीं। एक पार्टी के पास पूर्ण बहुमत ना होने की वजह से PPP और शहबाज शरीफ की पार्टी PML-N के बीच पॉवर शेयरिंग एग्रीमेंट हुआ था जिसके तहत मुख्यमंत्री और स्पीकर PPP का हुआ। वहीं गवर्नर और डिप्टी स्पीकर PML-N मिला। गिलगिट-बाल्टिस्तान और भारत का क्या कनेक्शन है? गिलगिट-बाल्टिस्तान ट्रांस-हिमालयन क्षेत्र में कश्मीर घाटी के उत्तर-पश्चिम में है। यह जम्मू-कश्मीर रियासत का हिस्सा था। तब यह रियासत पांच क्षेत्रों में बंटी थी- जम्मू, कश्मीर, लद्दाख, गिलगिट वजाहत और गिलगिट एजेंसी। 1947 से भारत के जिस हिस्से पर पाकिस्तान का कब्जा है, उसमें सिर्फ 15% एरिया पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में है। 85% हिस्सा तो गिलगिट-बाल्टिस्तान या नॉर्दर्न एरियाज में है। यह चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) का मुख्य इलाका है। सिंधु नदी पाकिस्तान में गिलगिट-बाल्टिस्तान से ही होकर प्रवेश करती है। गिलगिट-बाल्टिस्तान भारत से अलग कब हुआ? 1947 में। दरअसल, 1917 में USSR बनने के बाद ब्रिटिश इंडिया ने गिलगिट एजेंसी को 1935 में जम्मू-कश्मीर के महाराजा से 60 साल की लीज पर लिया था। पर जब भारत आजाद हुआ तो 15 दिन बाद गिलगित भी महाराजा हरिसिंह के अधीन आ गया था। 26 अक्टूबर 1947 को हरि सिंह ने अपनी रियासत को भारत में मर्ज करने का फैसला किया, तब ब्रिटिश कमांडर विलियम एलेक्जेंडर ब्राउन के नेतृत्व में गिलगिट स्काउट्स ने बगावत कर दी। उसने बाल्टिस्तान पर भी कब्जा कर लिया था, जो लद्दाख का हिस्सा था। स्कार्दू, करगिल और द्रास पर भी गिलगिट स्काउट्स का कब्जा था। युद्ध में भारतीय सेनाओं ने अगस्त 1948 में करगिल और द्रास पर फिर से कब्जा हासिल किया। पर गिलगिट पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा कायम रहा। 1 नवंबर 1947 को राजनीतिक दल रिवॉल्युशनरी काउंसिल ऑफ गिलगिट-बाल्टिस्तान ने गिलगिट-बाल्टिस्तान को स्वतंत्र देश घोषित किया था। 15 नवंबर को उसने पाकिस्तान में मर्जर की घोषणा की। पर इस मर्जर की भी शर्त ये थी कि पूरी तरह एडमिनिस्ट्रेटिव कंट्रोल के लिए यह होगा। पिछले साल पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने 1 नवंबर को गिलगिट-बाल्टिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया।

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