कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडलिस्ट अस्मिता को पसंद है बनारसी मिठाई:दोस्त और मेंटोर विजय यादव बोले – सिगरा स्टेडियम में अभ्यास, और माइंडसेट ने जिताया पदक


कॉमनवेल्थ गेम्स में शुक्रवार को भारत ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। अस्मिता डे ने गेम्स के इतिहास में जूडो में देश को पहला गोल्ड दिलाया। इस उपलब्धि के बाद बेलोनिया, दक्षिण त्रिपुरा के साथ ही साथ गाजियाबाद में जश्न का माहौल है। अस्मिता यूपी पुलिस में बतौर एसआई तैनात हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी जश्न का माहौल है। इसकी वजह है उनका बनारस से लगाव। खाली समय में वो बनारस में अपने दोस्त और जूडो खिलाड़ी विजय यादव के साथ सिगरा स्टेडियम में अभ्यास करती हैं। चोलापुर थानाक्षेत्र के आयर बाजार के पास सुलेमापुर गांव के निवासी विजय यादव ने लखनऊ में बीकेडी तहसील में नायब तहसीलदार के पद पर तैनात हैं। पिछले कई सालों से दोनों एक साथ जूडो का अभ्यास कर रहे हैं। विजय ने भी कॉमनवेल्थ गेम 2022 में जूडो में कांस्य पदक जीता था। सिगरा में अभ्यास की देखिये तीन तस्वीरें… गजब का है माइंडसेट, उसी से आया पदक दैनिक भास्कर के कार्यालय पहुंचे विजय यादव ने बताया – अस्मिता और मेरी मुलाकात साल 2020 में हुई थी। उस समय मै कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाड के लिए तैयारी कर रहा था। पेरिस में हुई यह मुलाकात दोस्ती में बदल गई। इसके बाद हम लोग साथ में ही प्रेक्टिस करने लगे। अक्सर वो और हम वाराणसी में रहे हैं तो वह और मै और वो दोनों सिगरा स्टेडियम में अभ्यास करते हैं। उसका माइंडसेट गजब का है। वह जो चीज ठान लेती है उसे करके ही मानती है। उसका ही परिणाम है यह स्वर्ण पदक है। पिता की मौत के बाद दिया था ट्रायल विजय ने बताया – कुछ महीने पहले अस्मिता के पिता का देहांत हुआ। जिसके बाद वह प्रेक्टिस छोड़कर घर चली गई थी। यहां उसने खाना-पीना छोड़ रखा था। इसी बीच कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स के ट्रायल की डेट आ गयी। जिसमें महज एक महीना था। वह 15 दिन तक सिर्फ लिक्विड पर रही। उसके बाद तैयारी के लिए फ्रांस चली गई। वहां 15 दिन की प्रेक्टिस के बाद वापस आयी और ट्रायल में सेलेक्शन हो गया। विजय ने इंजरी की वजह से नहीं दिया ट्रायल विजय ने बताया – इस बार का ट्रायल वो नहीं दे पाए क्योंकि दोनों कंधे उनके टूट गए थे और दोनों की सर्जरी हुई है। विजय ने बताया – मैंने अपना पूरा फोकस अस्मिता पर लगा दिया था। वह ट्रायल के बाद बनारस आयी थी और यहां मै उसे रोजाना लेजाकर प्रैक्टिस करवा रहा था। उसके अंदर जो जूनून था वह आज दिखाई दे रहा है। पसंद है बनारसी मिठाई विजय ने बताया – अस्मिता जब जीती तो उसके बाद उसने फोन पर बात की तो उसने पदक के बारे में बताया लेकिन उसके बाद तुरंत ही एशियन गेम्स की तैयारियों की बात शुरू कर दी। वह 15 दिन बाद वाराणसी आएगी। विजय ने बताय- अस्मिता को बनारस की मिठाई बहुत पसंद है और वह यहां जब आती है तो मिठाई रोज खाती है। होगा भव्य स्वागत आरएसओ नवीन कुमार सिंह ने बताया कि शनिवार को शाम को विजय ने उनको जानकारी दी कि इस सिगरा स्टेडियम में जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता है अभ्यास करती थीं। इसपर गर्व की अनुभूति हुई है क्योंकि वो पहली महिला खिलाड़ी हैं। जिन्होंने देश के लिए जूडो में पदक जीता है। वो काशी जब भी आएंगी उनका भव्य स्वागत किया जाएगा। कनाडा की खिलाड़ी को हराया त्रिपुरा की 23 साल की अस्मिता डे ने फाइनल में शानदार वापसी करते हुए कनाडा की हेइडी क्वाच को हराया। मुकाबले की शुरुआत में उन्होंने एक अंक गंवाया और पेनल्टी भी मिली, लेकिन आक्रामक खेल जारी रखते हुए स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। गोल्डन स्कोर में अस्मिता ने निर्णायक अंक हासिल कर इतिहास रच दिया।

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