कृषि विश्वविद्यालय में 10दिवसीय कार्यशाला खत्म; मूल्यवर्धन की जानकारी दी:देश के 6 राज्यों से आए 25 प्रतिभागियों ने लिया प्रशिक्षण


आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय में ‘सतत खाद्य प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन उद्यमों की स्थापना’ विषय पर आयोजित 10 दिवसीय कार्यशाला का शनिवार शाम समापन हुआ। कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह के दिशा-निर्देशन में आयोजित कार्यशाला में छह राज्यों से आए 25 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण लिया। समापन समारोह में कुलसचिव डॉ. पीएस प्रमाणिक ने कार्यशाला में सहयोग करने वाली डॉ. अनीशा वर्मा, डॉ. ममता कुमारी, डॉ. प्रज्ञा पांडेय और डॉ. श्वेता सचान को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। राष्ट्रीय पोषण माह के तहत आयोजित व्यंजन प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले छात्र-छात्राओं को भी प्रमाण पत्र दिए गए। अधिष्ठाता डॉ. साधना सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कृषि उत्पादों की उपयोगिता और बाजार मूल्य बढ़ाने के लिए प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन की तकनीकों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने फल, सब्जियां, अनाज, मोटे अनाज सहित अन्य कृषि उत्पादों से गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ तैयार करने की प्रक्रिया समझाई। इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता मानक, पैकेजिंग, लेबलिंग, ब्रांडिंग और विपणन की जानकारी भी दी गई। अधिष्ठाता डॉ. प्रतिभा सिंह ने कहा कि आलू और गन्ने जैसी फसलों के प्रसंस्करण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इससे कृषि आधारित नए उद्यमों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है। पूर्व निदेशक शोध डॉ. शंभू प्रसाद ने कहा कि देश में हर वर्ष बड़ी मात्रा में फल एवं सब्जियां कटाई के बाद खराब हो जाती हैं। प्रसंस्करण, तकनीक और मूल्यवर्धन के माध्यम से इन उत्पादों का उपयोग कर नुकसान को कम किया जा सकता है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्वेता सचान ने किया। डॉ. अनीशा वर्मा ने अतिथियों के प्रति आभार जताया। इस दौरान अधिष्ठाता डॉ. नमिता जोशी, कुलपति के सचिव डॉ. जसवंत सिंह, उप कुलसचिव डॉ. रागिनी मिश्रा सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, वैज्ञानिक, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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